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शांति शिक्षा को अपने पाठ्यक्रमों में शामिल कर रहे विभिन्न देश
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गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र एवं राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से ‘शांति शिक्षा एवं मानवता के भविष्य’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वर्तमान संदर्भों में गांधी एवं टैगोर की शिक्षाओं को याद करते हुए इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय संघ के देश व अन्य विकासशील भी शांति शिक्षा को अपने पाठ्यक्रमों में शामिल करने कर रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. हिमांशु बौड़ाई ने युद्धों तथा संघर्षों के बीच शांति शिक्षा व संस्कृति की आवश्यकता पर बल दिया। इंडोनेशिया की पूर्व चुनाव आयुक्त एवं सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज की वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. श्री नूरयंति ने इंडोनेशिया की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व वैचारिक समानता को स्थापित करते हुए इंडोनेशिया के प्रतीक गरुड़ एवं उसके अंगों का आशय स्पष्ट किया। गरुड़ को उन्होंने भारतीय महाकाव्य में वर्णित भगवान विष्णु के समान बताया। उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया पंचशील सिद्धांत मानता है। वर्धमान महावीर विवि कोटा के पूर्व कुलपति प्रो. नरेश दाधीच ने कहा कि आज व्यवस्था आत्म केंद्रित हो गई है। जबकि हमें मानव केंद्रित होने की आवश्यकता है। उन्होंने संपूर्ण मानवतावाद को शिक्षा का आधार बताया। वहीं राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा कि समूची मानव जाति मानवता संकट से जूझ रही है। इसमें शांति शिक्षा व महात्मा गांधी के विचार संजीवनी की भांति हैं, जिन्हें व्यापक रूप से पोषित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा मनस्वी सेमवाल ने किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. हिमांशु बौड़ाई ने युद्धों तथा संघर्षों के बीच शांति शिक्षा व संस्कृति की आवश्यकता पर बल दिया। इंडोनेशिया की पूर्व चुनाव आयुक्त एवं सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज की वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. श्री नूरयंति ने इंडोनेशिया की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व वैचारिक समानता को स्थापित करते हुए इंडोनेशिया के प्रतीक गरुड़ एवं उसके अंगों का आशय स्पष्ट किया। गरुड़ को उन्होंने भारतीय महाकाव्य में वर्णित भगवान विष्णु के समान बताया। उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया पंचशील सिद्धांत मानता है। वर्धमान महावीर विवि कोटा के पूर्व कुलपति प्रो. नरेश दाधीच ने कहा कि आज व्यवस्था आत्म केंद्रित हो गई है। जबकि हमें मानव केंद्रित होने की आवश्यकता है। उन्होंने संपूर्ण मानवतावाद को शिक्षा का आधार बताया। वहीं राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा कि समूची मानव जाति मानवता संकट से जूझ रही है। इसमें शांति शिक्षा व महात्मा गांधी के विचार संजीवनी की भांति हैं, जिन्हें व्यापक रूप से पोषित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा मनस्वी सेमवाल ने किया।
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