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ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने में जुटा विभाग
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विकास खंड कीर्तिनगर के पंपिंग पेयजल योजनाओं से जुड़े ग्रामीणों को अब गंदे पानी की समस्या से निजात मिलने वाली है। इसके लिए विभाग की ओर से फिल्टर प्लांटों के निर्माण के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। वहीं पेयजल टैंकों की सफाई का काम भी शुरू किया गया है।
विकास खंड कीर्तिनगर की लक्ष्मोली हडिमधार, कोटेश्वर सिल्काखाल व देवप्रयाग की झंडीधार पंपिंग आदि पंपिंग पेयजल योजना पर फिल्टर प्लांट न होने से ग्रामीणों को गंदे पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता नरेशपाल ने बताया कि पंपिंग पेयजल योजनाओं पर फिल्टर प्लांट नहीं हैं। बारिश होने पर अलकनंदा नदी का पानी मटमैला हो जाता है जो सीधे गांवों तक पहुंचता है। अब जल जीवन मिशन के तहत इन पंपिंग पेयजल योजनाओं पर फिल्टर प्लांट निर्माण के लिए गांवों का सर्वे करवाया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद डीपीआर गठित कर स्वीकृति के लिए शासन को भेजी जाएगी। वित्तीय स्वीकृति मिलने पर फिल्टर प्लांटों का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पंपिंग पेयजल योजना के करीब 56 से अधिक टैंकों पर सफाई का कार्य किया जा रहा है। इनमें 46 टैंकों की सफाई का काम पूरा हो चुका है।
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विकास खंड कीर्तिनगर की लक्ष्मोली हडिमधार, कोटेश्वर सिल्काखाल व देवप्रयाग की झंडीधार पंपिंग आदि पंपिंग पेयजल योजना पर फिल्टर प्लांट न होने से ग्रामीणों को गंदे पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता नरेशपाल ने बताया कि पंपिंग पेयजल योजनाओं पर फिल्टर प्लांट नहीं हैं। बारिश होने पर अलकनंदा नदी का पानी मटमैला हो जाता है जो सीधे गांवों तक पहुंचता है। अब जल जीवन मिशन के तहत इन पंपिंग पेयजल योजनाओं पर फिल्टर प्लांट निर्माण के लिए गांवों का सर्वे करवाया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद डीपीआर गठित कर स्वीकृति के लिए शासन को भेजी जाएगी। वित्तीय स्वीकृति मिलने पर फिल्टर प्लांटों का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पंपिंग पेयजल योजना के करीब 56 से अधिक टैंकों पर सफाई का कार्य किया जा रहा है। इनमें 46 टैंकों की सफाई का काम पूरा हो चुका है।
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