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Pauri News: एआई युग में सिविल सेवकों की भूमिका पर किया मंथन
Sun, 14 Jun 2026 05:14 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sun, 14 Jun 2026 05:14 PM IST
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- अवसर और चुनौतियों के बारे में दी गई जानकारी
श्रीनगर। गढ़वाल विवि के डॉ. आंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र की ओर से वर्चुअल माध्यम से आयोजित मंथन कार्यक्रम में एआई-संचालित भारत में भविष्य के सिविल सेवक: चुनौतियां और अवसर विषय पर चर्चा की गई। मौके पर बतौर मुख्य वक्ता उत्तराखंड वन विभाग के सहायक वन संरक्षक डॉ. दिवाकर पंत मौजूद रहे। डॉ. पंत ने वन प्रबंधन में एआई के उपयोग पर विशेष जानकारी देते हुए बताया कि रिमोट सेंसिंग और उपग्रह तकनीक की मदद से वनाग्नि की पूर्व चेतावनी, जोखिम क्षेत्रों की पहचान और प्रभावी निगरानी संभव हो रही है।
वहीं जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव निगरानी और संरक्षण रणनीतियों के निर्माण में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। केंद्र के समन्वयक प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन-प्रशासन, नीति निर्माण और जनसेवा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही है, इसलिए भावी सिविल सेवकों के लिए इसके अवसरों और चुनौतियों को समझना आवश्यक है।
कहा कि भविष्य के सिविल सेवकों को तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखना होगा। संचालन डॉ. आशीष बहुगुणा ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रकाश सिंह, डॉ. अरविंद रावत, डॉ. वीर सिंह, डॉ. शैलेन्द्र चमोला और डॉ. मुकेश एच. सहाय सहित विवि के अनेक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के डॉ. आंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र की ओर से वर्चुअल माध्यम से आयोजित मंथन कार्यक्रम में एआई-संचालित भारत में भविष्य के सिविल सेवक: चुनौतियां और अवसर विषय पर चर्चा की गई। मौके पर बतौर मुख्य वक्ता उत्तराखंड वन विभाग के सहायक वन संरक्षक डॉ. दिवाकर पंत मौजूद रहे। डॉ. पंत ने वन प्रबंधन में एआई के उपयोग पर विशेष जानकारी देते हुए बताया कि रिमोट सेंसिंग और उपग्रह तकनीक की मदद से वनाग्नि की पूर्व चेतावनी, जोखिम क्षेत्रों की पहचान और प्रभावी निगरानी संभव हो रही है।
वहीं जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव निगरानी और संरक्षण रणनीतियों के निर्माण में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। केंद्र के समन्वयक प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन-प्रशासन, नीति निर्माण और जनसेवा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही है, इसलिए भावी सिविल सेवकों के लिए इसके अवसरों और चुनौतियों को समझना आवश्यक है।
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कहा कि भविष्य के सिविल सेवकों को तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखना होगा। संचालन डॉ. आशीष बहुगुणा ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रकाश सिंह, डॉ. अरविंद रावत, डॉ. वीर सिंह, डॉ. शैलेन्द्र चमोला और डॉ. मुकेश एच. सहाय सहित विवि के अनेक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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