कीर्तिनगर: भालू की दहशत, तीन दिन में चार मकान तोड़े, कुराड़ में स्कूल जा रहे बच्चों ने देखा तार में फंसा भालू
उत्तराखंड के टिहरी जिले के कीर्तिनगर ब्लॉक के दूरस्थ टोला गांव में भालू की लगातार दस्तक से ग्रामीण दहशत में हैं। तीन दिन के भीतर चार मकानों को नुकसान पहुंचाने के साथ भालू ने घरों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। घटना के बाद अकेले रहने वाले बुजुर्गों समेत ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
विस्तार
विकासखंड कीर्तिनगर के दूरस्थ गांव टोला में इन दिनों भालू की दहशत है। इससे ग्रामीण भय के साये में जीने के लिए मजबूर हैं। महज तीन दिनों के भीतर भालू ने चार मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। ऐसे में अकेले रह रहे बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों में भारी दहशत और चिंता का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार नौ अक्टूबर की रात को भालू ने राजेंद्र सिंह पुंडीर और उनके पड़ोसी के मकान की पठालों व लकड़ियों को उखाड़कर वहां घुसा और घरों में रखी मधुमक्खियों को शहद समेत चट कर दिया। कमरों में भी भारी तोड़फोड़ की। इसके बाद 11 अक्टूबर की रात को भालू ने हरदेव सिंह और सुरेंद्र सिंह के मकानों को नुकसान पहुंचाया।
गांव के विजयपाल सिंह बर्त्वाल ने बताया कि भालू मुख्य रूप से मधुमक्खियों और शहद की तलाश में सूने पड़े घरों को निशाना बना रहा है और उन्हें तोड़ रहा है। गांव के लोगों ने वन विभाग से तत्काल सुरक्षा प्रदान करने और भालू के आतंक से निजात दिलाने की पुरजोर मांग की है। साथ ही घरों और संपत्तियों को हुए नुकसान का मुआवजा देने की भी मांग उठाई। डांगचौंरा के रेंजर संजय बेलवाल ने बताया कि कर्मचारी को गांव में भेजकर रंगीन लाइटें लगवाई गई थीं। अब एक बार फिर से वन विभाग के कर्मचारियों को प्रभावित गांव में रवाना किया जा रहा है।
कुराड़ गांव : खेतों में सुरक्षा के लिए लगाई तार फेंसिंग में फंसा भालू
थराली विकासखंड के कुराड़ गांव के बजवाड़ तोक में सोमवार सुबह एक भालू खेत की तार फेंसिंग में फंस गया था। गनीमत रही कि स्कूल जा रहे बच्चों, ग्रामीणों और अध्यापकों ने समय रहते सतर्कता बरती और वन विभाग को इसकी सूचना दी। उनकी सतर्कता से भालू की जान बचाई जा सकी।
सोमवार सुबह जब बच्चे स्कूल जा रहे थे तभी उन्होंने जंगल से गांव की ओर तार फेंसिंग में फंसे एक भालू को देखा। भालू की उसमें कमर फंस गई थी। वह न आगे बढ़ पा रहा था और न पीछे हट पा रहा था। दर्द से तड़प रहे भालू की आवाज से बच्च, अभिभावक और स्थानीय लोग डर गए।
स्थानीय हरीश देवराड़ी ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर वन क्षेत्राधिकारी मनोज देवराड़ी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। टीम ने संयम और सूझबूझ से काम लेते हुए कांटेदार तारों को काटा और रेस्क्यू कर भालू को वापस जंगल में छोड़ दिया। वहीं इस घटना से बच्चे डर गए थे। ऐसे में अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की मांग की।