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भालू के हमले में ग्रामीण जख्मी
कोटद्वार
Updated Thu, 26 Nov 2015 09:30 PM IST
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जयहरीखाल के बंदूण पास्ता गांव निवासी एक व्यक्ति भालू के हमले में बुरी तरह जख्मी हो गया है। उसके सिर और मुंह पर भालू ने गहरे जख्म कर दिए हैं। इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और डटकर लात-घूंसों से भालू का मुकाबला कर उसे भागने पर मजबूर कर दिया। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीण गंभीर रुप से घायल हुए व्यक्ति को गांव तक लाए। परिजन उसे लेकर कोटद्वार राजकीय अस्पताल पहुंचे, जहां उसका उपचार चल रहा है।
सतपुली क्षेत्र के मल्ला बदलपुर क्षेत्र के बंदूण पास्ता गांव निवासी कृपाराम रोज की भांति पशुओं को चराने के लिए पास के जंगल गया था। सुबह नौ बजे का समय था। गांव से सटे लालतप्पड़ के जंगल में पीछे से अचानक भालू ने उन पर हमला कर दिया। भारी-भरकम भालू ने अपने हाथों से उसे जकड़ लिया। इस दौरान दोनों में खूब गुत्थमगुत्था हुई। हमले में कृपाराम के मुंह और शरीर पर गहरे जख्म हो गए। उनसे खून बहने लगा, लेकिन कृपाराम ने हिम्मत नहीं हारी। लात-घूंसे से जैसे ही भालू दूर हुआ, उसने पत्थरों से भालू पर प्रहार कर जान बचाई। कृपाराम की बहादुरी से भालू भी भाग खड़ा हुआ। शोरगुल होने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल को किसी तरह गांव तक लाए। यहां से परिजन उसे लेकर कोटद्वार अस्पताल पहुंचे। घायल की पत्नी कमला देवी ने बताया कि उसके पति ने भालू से लड़कर अपनी जान बचाई। हिम्मत से काम नहीं लिया होता तो जान नहीं बचती। जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला ने क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने वन विभाग से गंभीर घायल को मुआवजा देने की मांग की।
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सतपुली क्षेत्र के मल्ला बदलपुर क्षेत्र के बंदूण पास्ता गांव निवासी कृपाराम रोज की भांति पशुओं को चराने के लिए पास के जंगल गया था। सुबह नौ बजे का समय था। गांव से सटे लालतप्पड़ के जंगल में पीछे से अचानक भालू ने उन पर हमला कर दिया। भारी-भरकम भालू ने अपने हाथों से उसे जकड़ लिया। इस दौरान दोनों में खूब गुत्थमगुत्था हुई। हमले में कृपाराम के मुंह और शरीर पर गहरे जख्म हो गए। उनसे खून बहने लगा, लेकिन कृपाराम ने हिम्मत नहीं हारी। लात-घूंसे से जैसे ही भालू दूर हुआ, उसने पत्थरों से भालू पर प्रहार कर जान बचाई। कृपाराम की बहादुरी से भालू भी भाग खड़ा हुआ। शोरगुल होने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल को किसी तरह गांव तक लाए। यहां से परिजन उसे लेकर कोटद्वार अस्पताल पहुंचे। घायल की पत्नी कमला देवी ने बताया कि उसके पति ने भालू से लड़कर अपनी जान बचाई। हिम्मत से काम नहीं लिया होता तो जान नहीं बचती। जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला ने क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने वन विभाग से गंभीर घायल को मुआवजा देने की मांग की।
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