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Pauri News: चेक बाउंस के आरोपी की अपील खारिज, निचली अदालत का फैसला बरकरार
Tue, 12 May 2026 06:51 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Tue, 12 May 2026 06:51 PM IST
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पौड़ी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पौड़ी धर्म सिंह की अदालत ने 8.28 लाख के चेक बाउंस के दोषी की आपराधिक अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही करार देते हुए पूर्व में दी गई सजा और जुर्माने के आदेश को सही ठहराते हुए सजा को बरकरार रखा।
मामले के अनुसार रतनपुर देहरादून निवासी विजेंद्र कुमार सकलानी ने आरोप लगाया था कि आरोपी ग्राम जखंड कीर्तिनगर टिहरी निवासी विपिन स्वरूप डोभाल ने जमीन बिक्री के नाम पर उससे 8.28 लाख लिए थे। तय समय पर जमीन न देने पर आरोपी ने रकम लौटाने के लिए दो चेक दिए, लेकिन बैंक में चेक जमा करने पर वे बाउंस हो गए। पीड़ित ने कानूनी नोटिस भेजकर पूरी राशि वसूलने की मांग की थी।
मामले में निचली अदालत ने एक मार्च 2023 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए छह माह के साधारण कारावास और 8.50 लाख के अर्थदंड से दंडित किया था। अदालत ने इस राशि में से 8.45 लाख रुपये पीड़ित को प्रतिकर के रूप में देने और पांच हजार राजकोष में जमा करने के आदेश दिए थे।
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आरोपी ने निचली अदालत के फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने पाया कि आरोपी अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि पीड़ित ने कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर अपना दावा साबित किया है। इसी आधार पर अदालत ने अपील निरस्त करते हुए निचली अदालत के फैसले को यथावत रखा। संवाद
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मामले के अनुसार रतनपुर देहरादून निवासी विजेंद्र कुमार सकलानी ने आरोप लगाया था कि आरोपी ग्राम जखंड कीर्तिनगर टिहरी निवासी विपिन स्वरूप डोभाल ने जमीन बिक्री के नाम पर उससे 8.28 लाख लिए थे। तय समय पर जमीन न देने पर आरोपी ने रकम लौटाने के लिए दो चेक दिए, लेकिन बैंक में चेक जमा करने पर वे बाउंस हो गए। पीड़ित ने कानूनी नोटिस भेजकर पूरी राशि वसूलने की मांग की थी।
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मामले में निचली अदालत ने एक मार्च 2023 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए छह माह के साधारण कारावास और 8.50 लाख के अर्थदंड से दंडित किया था। अदालत ने इस राशि में से 8.45 लाख रुपये पीड़ित को प्रतिकर के रूप में देने और पांच हजार राजकोष में जमा करने के आदेश दिए थे।
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आरोपी ने निचली अदालत के फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने पाया कि आरोपी अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि पीड़ित ने कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर अपना दावा साबित किया है। इसी आधार पर अदालत ने अपील निरस्त करते हुए निचली अदालत के फैसले को यथावत रखा। संवाद