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पूजा-अर्चना के बाद मंजूघोषेश्वर मंदिर के कपाट एक माह के लिए बंद
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देहलचौरी कांडा में मंजूघोष मंदिर में चढ़ाने के लिए निशाण ले जाते लोग
- फोटो : SHRINAGAR
कांडा स्थित मंजूघोषेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित मंजूघोष मेले के अंतिम दिन 10 निशाण (देव प्रतीक) चढ़ाए गए। दो दिवसीय मेले में कुल 11 निशाण भगवान शिव को अर्पित किए गए। पूजा-अर्चना के पश्चात मंदिर के कपाट बंद हो गए हैं। परंपरानुसार मेले के पश्चात एक माह के लिए मंजूघोषेश्वर महादेव मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। इस दौरान यहां मां भगवती की पूजा-अर्चना भी नहीं होगी।
शनिवार को कांडा में आयोजित दो दिवसीय मंजूघोष मेले का समापन हो गया। पहले दिन को छोटा कांडा और दूसरे दिन को बड़ा कांडा मेला कहा जाता है। छोटा कांडा में एक और बड़ा कांडा में 10 निशाण चढ़ाए गए। अंतिम निशाण पाली गांव के लोगों ने चढ़ाया।
मजीन मेला समिति के अध्यक्ष डीपी भट्ट ने बताया कि छोटा कांडा के दिन कांडा गांव से मां भगवती की डोली मंजूघोषेश्वर महादेव आती है। कांडा गांव भगवती का मायका माना जाता है। माता अपना ज्यादातर समय मायके में ही बिताती है। मेला समापन के बाद मंजूघोषेश्वर महादेव मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। एक माह भगवती महादेव के साथ मंदिर में एकांतवास में रहेंगी। इस दौरान न तो मंदिर के कपाट खुलेंगे और न ही पूजा-अर्चना की जाएगी। एक माह बाद मां भगवती की डोली वापस कांडा गांव स्थित मंदिर में जाएगी। तब पूजा-अर्चना पुन: शुरू होगी।
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शनिवार को कांडा में आयोजित दो दिवसीय मंजूघोष मेले का समापन हो गया। पहले दिन को छोटा कांडा और दूसरे दिन को बड़ा कांडा मेला कहा जाता है। छोटा कांडा में एक और बड़ा कांडा में 10 निशाण चढ़ाए गए। अंतिम निशाण पाली गांव के लोगों ने चढ़ाया।
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मजीन मेला समिति के अध्यक्ष डीपी भट्ट ने बताया कि छोटा कांडा के दिन कांडा गांव से मां भगवती की डोली मंजूघोषेश्वर महादेव आती है। कांडा गांव भगवती का मायका माना जाता है। माता अपना ज्यादातर समय मायके में ही बिताती है। मेला समापन के बाद मंजूघोषेश्वर महादेव मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। एक माह भगवती महादेव के साथ मंदिर में एकांतवास में रहेंगी। इस दौरान न तो मंदिर के कपाट खुलेंगे और न ही पूजा-अर्चना की जाएगी। एक माह बाद मां भगवती की डोली वापस कांडा गांव स्थित मंदिर में जाएगी। तब पूजा-अर्चना पुन: शुरू होगी।
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