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नहर के रिसाव से सहमे चौरासवासी
Pauri
Updated Sat, 04 Jan 2014 05:46 AM IST
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श्रीनगर। जल विद्युत परियोजना की नहर से पानी के रिसाव से चौरासवासी भयभीत हैं। ग्रामीणों ने कंपनी पर घटिया निर्माण का आरोप लगाया है। हालांकि कंपनी के अधिकारी इसे टेस्टिंग का दौर बताकर खामियाें को जल्द दूर करने की बात कह रहे हैं।
330 मेगावाट की श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का डीएसबी (डि सिल्टिंग बेसिन) सुपाणा के पास बनाया है। पिछले हफ्ते टेस्टिंग के दौरान इससे पानी का रिसाव देखा गया है। चौरास-श्रीनगर बांध प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष बलबीर सिंह का कहना है कि पहले ही चरण में नहर से रिसाव होने से बाद में स्थितियां और खतरनाक हो सकती हैं। क्षेत्र की अधिकतर जमीन रेतीली है। ऐसे में जान-माल का नुकसान होने की आशंका है। नेगी ने बताया कि रिसाव के कारण डीएसबी के पास भू-धंसाव शुरू हो गया है। इस बारे में टिहरी जिला प्रशासन को लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। चौरास निवासी मनमोहन नैथानी ने बताया कि तीन बार कॉफर बांध टूटा और अब डीएसबी से भी रिसाव होने लगा है। अब अगर नहर में भी रिसाव हुआ, तो इसके किनारे बने भवनों के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।
डीएसबी में जो रिसाव हुआ है। दरअसल फ्लशिंग टनल से हुआ था। वैसे भी उसका बहाव भी नदी की ओर है। इससे इलाके को कोई खतरा नहीं है।
-संतोष रेड्डी, परियोजना समन्वयक।
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330 मेगावाट की श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का डीएसबी (डि सिल्टिंग बेसिन) सुपाणा के पास बनाया है। पिछले हफ्ते टेस्टिंग के दौरान इससे पानी का रिसाव देखा गया है। चौरास-श्रीनगर बांध प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष बलबीर सिंह का कहना है कि पहले ही चरण में नहर से रिसाव होने से बाद में स्थितियां और खतरनाक हो सकती हैं। क्षेत्र की अधिकतर जमीन रेतीली है। ऐसे में जान-माल का नुकसान होने की आशंका है। नेगी ने बताया कि रिसाव के कारण डीएसबी के पास भू-धंसाव शुरू हो गया है। इस बारे में टिहरी जिला प्रशासन को लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। चौरास निवासी मनमोहन नैथानी ने बताया कि तीन बार कॉफर बांध टूटा और अब डीएसबी से भी रिसाव होने लगा है। अब अगर नहर में भी रिसाव हुआ, तो इसके किनारे बने भवनों के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।
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डीएसबी में जो रिसाव हुआ है। दरअसल फ्लशिंग टनल से हुआ था। वैसे भी उसका बहाव भी नदी की ओर है। इससे इलाके को कोई खतरा नहीं है।
-संतोष रेड्डी, परियोजना समन्वयक।