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आईओटी हेल्थकेयर और कृषि के लिए साबित होगा वरदान-compat
Updated Thu, 13 Sep 2018 10:29 PM IST
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पौड़ी। आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) हेल्थकेयर और कृषि के लिए वरदान साबित होगा। यह कहना है कि एआईएसीटीआर दिल्ली के प्रोफेसर डा. आरएस राव का। राव बृहस्पतिवार को जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) को पूरी तरह से उपयोगी बनाने के लिए वायरलेस कम्यूनिकेशन एवं एडोक नेटवर्कस की तकनीक को भी विकसित करना होगा। इस तकनीक के जरिये स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में क्रांति आएगी। एमएनएनआईटी इलाहाबाद के प्रोफेसर दिव्या कुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में भी इससे क्रांतिकारी बदलाव आएगा। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। सेंसर का उपयोग कर जल की बर्बादी को रोका जा सकेगा। इसके अलावा कुशल जल प्रबंधन किया जा सकता है। इससे भूमि में नमी व पीएच स्तर आदि का भी पता लगाया जा सकेगा, ताकि किसान मिट्टी के अनुसार बीज की बुआई कर सके। इसके अलावा वैश्विक बाजार में फसल बिक्री में वृद्धि होगी। किसान इसके जरिये देश विदेश के बाजार से संपर्क में रह सकेगा। कार्यशाला में विभागाध्यक्ष डा. आशीष नेगी, समन्वयक डा. एसके वर्मा, रजिस्ट्रार डा. एचएस भदौरिया, टीपीओ संदीप कुमार, पपेंद्र कुमार, अभिषेक गुप्ता, डा. भूमिका गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर विवेक कुमार टम्टा, वीएम ठक्कर आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) को पूरी तरह से उपयोगी बनाने के लिए वायरलेस कम्यूनिकेशन एवं एडोक नेटवर्कस की तकनीक को भी विकसित करना होगा। इस तकनीक के जरिये स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में क्रांति आएगी। एमएनएनआईटी इलाहाबाद के प्रोफेसर दिव्या कुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में भी इससे क्रांतिकारी बदलाव आएगा। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। सेंसर का उपयोग कर जल की बर्बादी को रोका जा सकेगा। इसके अलावा कुशल जल प्रबंधन किया जा सकता है। इससे भूमि में नमी व पीएच स्तर आदि का भी पता लगाया जा सकेगा, ताकि किसान मिट्टी के अनुसार बीज की बुआई कर सके। इसके अलावा वैश्विक बाजार में फसल बिक्री में वृद्धि होगी। किसान इसके जरिये देश विदेश के बाजार से संपर्क में रह सकेगा। कार्यशाला में विभागाध्यक्ष डा. आशीष नेगी, समन्वयक डा. एसके वर्मा, रजिस्ट्रार डा. एचएस भदौरिया, टीपीओ संदीप कुमार, पपेंद्र कुमार, अभिषेक गुप्ता, डा. भूमिका गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर विवेक कुमार टम्टा, वीएम ठक्कर आदि मौजूद रहे।
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