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...जड़ी-बूटी उत्पादन में बनाए युवा करियर: प्रो. नौटियाल
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श्रीनगर। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान की ओर से हरित कौशल विकास पर आधारित आठ दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सोमवार से हिमालयी पर्यावरण विकास संस्थान की गढ़वाल इकाई में ग्रामीण तकनीकी एवं हरित कौशल विकास समन्वयन: मध्य हिमालयी क्षेत्रों में कौशल विकास के माध्यम से जैव संपदा के सदुपयोग एवं प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन द्वारा रोजगार के सृजन अवसर विषय पर कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (एचएपीपीआरसी) के निदेशक प्रो. एमसी नौटियाल ने शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास पर जोर दिया। उन्होंने चमोली जिले के घेस गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के युवा कूट-कुटकी व अन्य जड़ी-बूटियों का उत्पादन कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि औषधीय व सगंध पादपों के कृषिकरण के साथ-साथ इनसे निर्मित उत्पादों की वर्तमान समय में बहुत मांग है। स्वरोजगार का यह बेहतर जरिया है। विशिष्ट अतिथि डा. एके गंगवार ने कहा कि वर्तमान में प्राकृतिक संसाधनों पर स्वरोजगार के साधन विकसित हुए हैं। वन्य खाद्य फलों के प्रसंस्करण से भी युवाओं को रोजगार मिला है। गढ़वाल विवि के डा. जेएस चौहान ने कहा कि जैव विविधता में नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नदियों का संरक्षण जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के वैज्ञानिक प्रभारी डा. एके मैखुरी ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैविक कृषि, फूलों की खेती व बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की तकनीकियों के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन ताजबर बिष्ट ने किया।
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जारी
सन्दीप
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सोमवार से हिमालयी पर्यावरण विकास संस्थान की गढ़वाल इकाई में ग्रामीण तकनीकी एवं हरित कौशल विकास समन्वयन: मध्य हिमालयी क्षेत्रों में कौशल विकास के माध्यम से जैव संपदा के सदुपयोग एवं प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन द्वारा रोजगार के सृजन अवसर विषय पर कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (एचएपीपीआरसी) के निदेशक प्रो. एमसी नौटियाल ने शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास पर जोर दिया। उन्होंने चमोली जिले के घेस गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के युवा कूट-कुटकी व अन्य जड़ी-बूटियों का उत्पादन कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि औषधीय व सगंध पादपों के कृषिकरण के साथ-साथ इनसे निर्मित उत्पादों की वर्तमान समय में बहुत मांग है। स्वरोजगार का यह बेहतर जरिया है। विशिष्ट अतिथि डा. एके गंगवार ने कहा कि वर्तमान में प्राकृतिक संसाधनों पर स्वरोजगार के साधन विकसित हुए हैं। वन्य खाद्य फलों के प्रसंस्करण से भी युवाओं को रोजगार मिला है। गढ़वाल विवि के डा. जेएस चौहान ने कहा कि जैव विविधता में नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नदियों का संरक्षण जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के वैज्ञानिक प्रभारी डा. एके मैखुरी ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैविक कृषि, फूलों की खेती व बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की तकनीकियों के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन ताजबर बिष्ट ने किया।
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