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49 गांव सूखे की चपेट में
ब्यूरो/अमर उजाला पौड़ी।
Updated Tue, 04 Apr 2017 10:00 PM IST
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गर्मी शुरू होते ही पानी के स्रोत सूखने के कारण सूखा पड़े टैंक पर लटकाया ताला।
- फोटो : amar ujala
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गर्मी शुरू होते ही पहाड़ में पेयजल संकट शुरू हो गया है। जिले में अब तक 49 गांव ऐसे हैं, जिन्हें जल संस्थान ने सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इनमें से चार गांवों में पानी के टैंकर चलने शुरू हो गए हैं, जबकि 24 गांव ऐसे हैं, जोकि दुर्गम क्षेत्र में हैं। इन गांवों में न तो टैंकर जा सकता है और न ही हैंडपंप की व्यवस्था हो सकती है।
जिले में पेयजल की 290 योजनाएं हैं। इनमें से 104 एकल, 184 बहुल, जबकि तीन नगरीय योजनाएं हैं। जिले के कुल 1188 गांवों में 2,16,674 जनसंख्या है। जनसंख्या के हिसाब से 30 मिलियन लीटर पानी की उपलब्धता होनी चाहिए, लेकिन गर्मी के चलते 48 स्रोत सूखने के चलते गांवों में पानी की समस्या पैदा हो गई है। एक अप्रैल से क्षेत्र में पड़ते गांव बुगानी, कलेत, पंडोरी व कांसखेत में टैंकरों का संचालन शुरू हो गया है।
135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी देने के हैं मानक
हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रति व्यक्ति को 135 लीटर पानी देने के मानक तय किए हैं, लेकिन स्रोत सूखने के कारण कई गांवों में प्रति व्यक्ति को 70 से 80 लीटर पानी भी नहीं मिल पाता। सबसे बुरा हाल कल्जीखाल, खिर्सू, एकेश्वर और पोखड़ा ब्लॉक का है। विभाग की ओर से इन गांवों के लिए हैंडपंप की व्यवस्था भी नहीं की जा रही है।
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विभाग दो सालों में अब तक सिर्फ 10 हैंडपंप ही लगा पाया।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता प्रवीन कुमार सैणी ने बताया कि गर्मियों में पानी के स्रोत सूखने के कारण पानी की किल्लत बढ़ जाती है। विभाग के पास टैंकरों का ही सहारा है। जिस गांव में पानी की समस्या आ रही है, वहां पर टैंकर भेजकर काम चला रहे हैं।
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जिले में पेयजल की 290 योजनाएं हैं। इनमें से 104 एकल, 184 बहुल, जबकि तीन नगरीय योजनाएं हैं। जिले के कुल 1188 गांवों में 2,16,674 जनसंख्या है। जनसंख्या के हिसाब से 30 मिलियन लीटर पानी की उपलब्धता होनी चाहिए, लेकिन गर्मी के चलते 48 स्रोत सूखने के चलते गांवों में पानी की समस्या पैदा हो गई है। एक अप्रैल से क्षेत्र में पड़ते गांव बुगानी, कलेत, पंडोरी व कांसखेत में टैंकरों का संचालन शुरू हो गया है।
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135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी देने के हैं मानक
हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रति व्यक्ति को 135 लीटर पानी देने के मानक तय किए हैं, लेकिन स्रोत सूखने के कारण कई गांवों में प्रति व्यक्ति को 70 से 80 लीटर पानी भी नहीं मिल पाता। सबसे बुरा हाल कल्जीखाल, खिर्सू, एकेश्वर और पोखड़ा ब्लॉक का है। विभाग की ओर से इन गांवों के लिए हैंडपंप की व्यवस्था भी नहीं की जा रही है।
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विभाग दो सालों में अब तक सिर्फ 10 हैंडपंप ही लगा पाया।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता प्रवीन कुमार सैणी ने बताया कि गर्मियों में पानी के स्रोत सूखने के कारण पानी की किल्लत बढ़ जाती है। विभाग के पास टैंकरों का ही सहारा है। जिस गांव में पानी की समस्या आ रही है, वहां पर टैंकर भेजकर काम चला रहे हैं।