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मांगा पानी, मिले नोटिस, अब होगा सत्याग्रह
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पौड़ी। विकासखंड कोट के 60 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने सरकार से पानी मांगा। इसके लिए उन्होंने आंदोलन भी किया। ग्रामीणों को पानी तो नहीं मिला, लेकिन प्रशासन उन्हें नोटिस जरूर थमा रहा है। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने अब सत्याग्रह किए जाने का निर्णय लिया है।
विकास खंड कोट के 60 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने रामकुंड-कादेखाल पेयजल पंपिंग योजना की मांग को लेकर अप्रैल-मई 2018 को आंदोलन किया। सबदरखाल में हुए आंदोलन के दौरान ग्रामीणों को स्थानीय प्रशासन ने पानी दिए जाने का लिखित आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीणों को निराशा ही मिली। ग्रामीणों ने पेयजल मंत्री, सचिव व मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की गुहार लगाई, लेकिन अब आंदोलन में शामिल ग्रामीणों को स्थानीय प्रशासन नोटिस भेज रहा है। इसमें ग्रामीणों पर कई आरोप लगाए गए हैं। रामकुंड-कादेखाल पेयजल पंपिंग योजना प्रयास विकास समिति के अध्यक्ष भरत सिंह कोटियाल, लक्ष्मण सिंह, कुलवीर सिंह, मुन्नी देवी, मंगला देवी व वैशाली देवी ने कहा कि ग्रामीणों ने मूलभूत आवश्यकता के लिए शांतिपूर्वक आंदोलन किया। सरकार ने ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेने के बजाय शांतिपूर्वक चले आंदोलन में गंभीर आरोप लगाते हुए करीब 57 नोटिस ग्रामीणों को भेजे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस व्यवहार के आहत ग्रामीणों ने सुनवाई की तारीख 25 फरवरी को अदालत के सामने ही सत्याग्रह किए जाने का निर्णय लिया है।
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विकास खंड कोट के 60 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने रामकुंड-कादेखाल पेयजल पंपिंग योजना की मांग को लेकर अप्रैल-मई 2018 को आंदोलन किया। सबदरखाल में हुए आंदोलन के दौरान ग्रामीणों को स्थानीय प्रशासन ने पानी दिए जाने का लिखित आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीणों को निराशा ही मिली। ग्रामीणों ने पेयजल मंत्री, सचिव व मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की गुहार लगाई, लेकिन अब आंदोलन में शामिल ग्रामीणों को स्थानीय प्रशासन नोटिस भेज रहा है। इसमें ग्रामीणों पर कई आरोप लगाए गए हैं। रामकुंड-कादेखाल पेयजल पंपिंग योजना प्रयास विकास समिति के अध्यक्ष भरत सिंह कोटियाल, लक्ष्मण सिंह, कुलवीर सिंह, मुन्नी देवी, मंगला देवी व वैशाली देवी ने कहा कि ग्रामीणों ने मूलभूत आवश्यकता के लिए शांतिपूर्वक आंदोलन किया। सरकार ने ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेने के बजाय शांतिपूर्वक चले आंदोलन में गंभीर आरोप लगाते हुए करीब 57 नोटिस ग्रामीणों को भेजे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस व्यवहार के आहत ग्रामीणों ने सुनवाई की तारीख 25 फरवरी को अदालत के सामने ही सत्याग्रह किए जाने का निर्णय लिया है।
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