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सरकार तय नहीं कर पाई माल्टे का समर्थन मूल्य
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:38 PM IST
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पौड़ी। माल्टा उत्पादकों को इस बार जून-जुलाई में ओलावृष्टि से बड़ा झटका लगा है। इसके बावजूद उद्यान विभाग द्वारा समर्थन मूल्य घोषित न होने से काश्तकारों को औने-पौने दामों पर माल्टा बेचना पड़ रहा है।
जिले में ब्लाक थलीसैंण, पाबौ, पौड़ी, खिर्सू माल्टे का बड़ा उत्पादक क्षेत्र है। गत वर्ष समय पर माल्टे का समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद जिले के निकटवर्ती सात ब्लाकों से 30 क्विंटल माल्टा दिल्ली समेत अन्य बाजारों में पहुंचा और काश्ततारों को भी मुनाफा हुआ। इस वर्ष माल्टे का समर्थन मूल्य अभी तक घोषित नहीं हुआ है। ऐसे में माल्टे की फसल बर्बादी की ओर है। माल्टा रेडी-ठेली वाले औने-पौने दामों में खरीद रहे हैं। ब्लाक पाबौ के ग्राम कुई निवासी जगमोहन भंडारी बताते हैं कि उनका गांव मुख्यालय से 36 किमी की दूरी पर है। उम्मीद थी कि उद्यान विभाग पिछले साल की तर्ज पर मोबाइल वैन से माल्टे की खरीदारी करेगा, लेकिन अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हुई। ब्लाक पौड़ी के डुंगरी गांव की वीरा देवी व राजेंद्र सिंह आदि भी समर्थन मूल्य घोषित होने के इंतजार में हैं। इसी तर्ज पर अन्य गांवों में भी माल्टा उत्पादक निराश हैं। वीरा देवी कहती हैं कि अब माल्टा उन्होंने पेड़ पर ही छोड़ दिए हैं और बंदर लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। वे बताती हैं कि इस वर्ष जून-जुलाई में ओलावृष्टि से पहले ही फसल को बड़ा नुकसान हुआ और इस पर विभाग की देरी से उन्हें हानि हो रही है।
जिला उद्यान अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि माल्टे के समर्थन मूल्य को लेकर शासन को पत्रावलियां भेजी गई हैं, लेकिन अभी तक समर्थन मूल्य घोषित नहीं हुआ है। इसके अलावा ओलावृष्टि से माल्टे को नुकसान पहुंचा और इस बार ग्रेड-डी का माल्टा ही गांवों में मौजूद है। इस माल्टे का उपयोग जूस बनाने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए प्राइवेट एजेंसियों से संपर्क साधा जा रहा है।
जिले में ब्लाक थलीसैंण, पाबौ, पौड़ी, खिर्सू माल्टे का बड़ा उत्पादक क्षेत्र है। गत वर्ष समय पर माल्टे का समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद जिले के निकटवर्ती सात ब्लाकों से 30 क्विंटल माल्टा दिल्ली समेत अन्य बाजारों में पहुंचा और काश्ततारों को भी मुनाफा हुआ। इस वर्ष माल्टे का समर्थन मूल्य अभी तक घोषित नहीं हुआ है। ऐसे में माल्टे की फसल बर्बादी की ओर है। माल्टा रेडी-ठेली वाले औने-पौने दामों में खरीद रहे हैं। ब्लाक पाबौ के ग्राम कुई निवासी जगमोहन भंडारी बताते हैं कि उनका गांव मुख्यालय से 36 किमी की दूरी पर है। उम्मीद थी कि उद्यान विभाग पिछले साल की तर्ज पर मोबाइल वैन से माल्टे की खरीदारी करेगा, लेकिन अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हुई। ब्लाक पौड़ी के डुंगरी गांव की वीरा देवी व राजेंद्र सिंह आदि भी समर्थन मूल्य घोषित होने के इंतजार में हैं। इसी तर्ज पर अन्य गांवों में भी माल्टा उत्पादक निराश हैं। वीरा देवी कहती हैं कि अब माल्टा उन्होंने पेड़ पर ही छोड़ दिए हैं और बंदर लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। वे बताती हैं कि इस वर्ष जून-जुलाई में ओलावृष्टि से पहले ही फसल को बड़ा नुकसान हुआ और इस पर विभाग की देरी से उन्हें हानि हो रही है।
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जिला उद्यान अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि माल्टे के समर्थन मूल्य को लेकर शासन को पत्रावलियां भेजी गई हैं, लेकिन अभी तक समर्थन मूल्य घोषित नहीं हुआ है। इसके अलावा ओलावृष्टि से माल्टे को नुकसान पहुंचा और इस बार ग्रेड-डी का माल्टा ही गांवों में मौजूद है। इस माल्टे का उपयोग जूस बनाने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए प्राइवेट एजेंसियों से संपर्क साधा जा रहा है।
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