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विवि प्रशासन व छात्रों की वार्ता विफल

Tue, 30 Apr 2019 09:43 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2019 09:43 PM IST
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विवि प्रशासन व छात्रों की वार्ता विफल

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श्रीनगर। गढ़वाल विवि प्रशासनिक भवन में छात्रों व विवि प्रशासन की वार्ता बेनतीजा रही। हालांकि विवि प्रशासन ने छात्रों को आउटसोर्स कर्मचारियों को यथावत ररखने का लिखित आश्वासन दिया है, लेकिन इस पर अभी तक कुलपति की मोहर नहीं लगी। ऐसे में छात्रों ने कहा कि जब तक आउटसोर्स कर्मियों का नियुक्ति पत्र जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मंगलवार दोपहर में कुलपति सचिवालय सभागार में छात्रों की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल, कुलसचिव डा. एके झा से वार्ता हुई। छात्र आउटसोर्स कर्मचारियों को पूर्व की भांति यथावत रखने की मांग पर अड़े रहे। हालांकि कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने बजट नहीं होने पर असमर्थता जताई, लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे। करीब दो घंटे बाद कुलसचिव बैठक की कार्यवृत्त टाइप करवाने की बात कहकर बैठक कक्ष से चले गए। कुछ देर बाद कुलपति भी चलीं गई। कुछ देर बाद मुख्य नियंता प्रो. अरुण बहुगुणा लिखित आश्वासन लेकर पहुंचे, जिसमें लिखा गया था कि सुरक्षा टेंडर को निरस्त कर बजट की उपलब्धता के आधार पर पूर्व से कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों को यथावत रखा जाएगा, लेकिन छात्र कर्मियों को पूर्व की भांति रखने की मांग पर अड़े। फिर बाद में कुलसचिव ने आउटसोर्स कर्मियों यथावत रखने का आश्वासन दिया। आश्वासन पर प्रशासन के प्रतिनिधि एएसपी पीके राय, एसडीएम दीपेंद्र नेगी, सीओ अनिल जोशी, तहसीलदार सुनील राज ने भी हस्ताक्षर किए। वहीं कुलसचिव का कहना है कि कुलपति की स्वीकृति के बाद ही आश्वासन लागू होगा। वार्ता में छात्रसंघ अध्यक्ष अंकित उछोली, सचिव राम प्रकाश रैम्स, कोषाध्यक्ष शिवानी धनाई, सुधीर जोशी, विनीत पोस्ती, संदीप राणा, अमित प्रदाली, अतुल सती, मनोज रावत, पुष्पेंद्र आदि मौजूद थे।
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वार्ता में उठा कुलसचिव के बाउंसर का मुद्दा
श्रीनगर। कुलसचिव डा. एके झा की ओर से निजी खर्चे पर रखे गए बाउंसर का मुद्दा छात्रों ने खूब उछाला। छात्र नेताओं ने अपनी सुरक्षा के लिए बाउंसर रखे जाने पर कुलसचिव को खूब खरी खोटी भी सुनाई।
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छात्रों से वार्ता करने बिना होमवर्क के आया प्रशासन
श्रीनगर। बिना कोई होमवर्क किए छात्रों से वार्ता करना विवि प्रशासन को महंगा पड़ा, जबकि छात्र अपनी मांगों के संदर्भ में पूरी जानकारी के साथ वार्ता में पहुंचे थे। छात्रों के तर्कों के समक्ष प्रशासन को कई बार निरुत्तर होना पड़ा। कई बार विवि प्रशासन को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी।
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