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हिम्मत के आगे बीमारी ने मानी हार
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पौड़ी। बीआर मॉडर्न स्कूल पौड़ी के छात्र अरविंद रावत की हिम्मत के आगे बीमारी ने भी हार मान ली है। सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के दौरान अरविंद की तबियत खराब थी, लेकिन उसने किसी भी विषय का पेपर नहीं छूटने दिया। और आज परिणाम आने पर उसने परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
यहां मांसौ मल्ली भिताई गांव में अरविंद अपनी मां और दो बहनों के साथ रहता है। उसके सिर से पिता का साया पांच साल पहले उठ चुका है। अरविंद फरवरी 2019 से खून की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे उसे बहुत कमजोरी महसूस होती है। बावजूद इसके वह हमेशा तीन किमी पैदल गांव से स्कूल आता है। मां संगीता देवी गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। उसके घर की माली हालत भी ठीक नहीं है, लेकिन अरविंद के पढ़ने की ललक कभी कम नहीं हुई। प्रधानाचार्य ने उसकी लगन व मेहनत को देखते हुए अरविंद को विद्यालय से छात्रवृत्ति भी प्रदान की। परीक्षा के दौरान भी अरविंद की तबियत खराब रही, लेकिन अरविंद ने हार नहीं मानी। आज उसने 92 फीसदी अंक हासिल कर अपने स्कूल के साथ ही पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
प्रधानाचार्य दामोदर प्रसाद ममगांई ने बताया कि फरवरी महीने से अरविंद की तबीयत खराब है। तबीयत खराब होने के बावजूद अरविंद ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अन्य बच्चों को भी सीख दी है। इन दिनों दून अस्पताल देहरादून में उपचार करा रहे अरविंद का कहना है कि उसका सपना सीए बनने का है, गुरुजनों के मार्गदर्शन में वह यह सपना पूरा करेगा।
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यहां मांसौ मल्ली भिताई गांव में अरविंद अपनी मां और दो बहनों के साथ रहता है। उसके सिर से पिता का साया पांच साल पहले उठ चुका है। अरविंद फरवरी 2019 से खून की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे उसे बहुत कमजोरी महसूस होती है। बावजूद इसके वह हमेशा तीन किमी पैदल गांव से स्कूल आता है। मां संगीता देवी गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। उसके घर की माली हालत भी ठीक नहीं है, लेकिन अरविंद के पढ़ने की ललक कभी कम नहीं हुई। प्रधानाचार्य ने उसकी लगन व मेहनत को देखते हुए अरविंद को विद्यालय से छात्रवृत्ति भी प्रदान की। परीक्षा के दौरान भी अरविंद की तबियत खराब रही, लेकिन अरविंद ने हार नहीं मानी। आज उसने 92 फीसदी अंक हासिल कर अपने स्कूल के साथ ही पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
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प्रधानाचार्य दामोदर प्रसाद ममगांई ने बताया कि फरवरी महीने से अरविंद की तबीयत खराब है। तबीयत खराब होने के बावजूद अरविंद ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अन्य बच्चों को भी सीख दी है। इन दिनों दून अस्पताल देहरादून में उपचार करा रहे अरविंद का कहना है कि उसका सपना सीए बनने का है, गुरुजनों के मार्गदर्शन में वह यह सपना पूरा करेगा।
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