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दिव्यांग, पोस्टमैन, डीलर को दी मनरेगा की मजदूरी
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:34 PM IST
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पौड़ी। पौड़ी में मनरेगा में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ग्राम प्रधान बिजनूर ने मनरेगा में फर्जी मस्टरोल भरकर पोस्टमैन, दिव्यांग, डीलर, स्वयं व अन्य को कुशल श्रमिक कर मनरेगा की दिहाड़ी चट कर ली। मामला प्रकाश में आने के बाद अब प्रशासन कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
मामला ब्लाक दुगड्डा के बिजनूर गांव का है। यहां के ग्राम प्रधान गणेश प्रसाद हैं। गणेश प्रसाद ने मनरेगा की धनराशि अधिक से अधिक अपने कब्जे में लेने का नायाब तरीका निकाला। वर्ष 2014-15 व 2015-16 में मनरेगा के तहत हुए निर्माण कार्यों में उन्होंने ऐसे लोगों के खातों में मनरेगा की धनराशि जमा की, जिन्होंने काम ही नहीं किया। गांव की दिव्यांग मायादेवी चल-फिर नहीं सकतीं, लेकिन उनके खाते में मनरेगा की मजदूरी जमा होती रही। गांव के ही चंद्रमोहन पुत्र सुुशील कुमार गांव के ही पोस्ट आफिस में पोस्टमैन हैं। इनके खाते में भी मजदूरी जमा होती रही। मोहन सिंह पुत्र फते सिंह राशन डीलर हैं। इनके द्वारा भी कोई कार्य नहीं किया गया, लेकिन मनरेगा की मजदूरी इसके खाते में भी जमा हुई। इसके अलावा गांव की टीमा देवी, सरोजनी देवी, खुशाल सिंह, उनका बेटा प्रदीप सिंह और सुशील के खातों में भी बिना कार्य के पैसा जमा होता रहा। इतना ही नहीं, ग्राम प्रधान गणेश प्रसाद ने अपने को भी कुशल श्रमिक दर्ज कर मनरेगा की दिहाड़ी चट कर ली। इस मामले को लेकर गांव के ही वीरेंद्र प्रसाद काला ने सूचना आयोग में शिकायत की। शिकायत के बाद लोक सूचना अधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी एमएम खान को इसकी जांच सौंपी। डीपीआरओ ने जांच में यह खुलासा करने के बाद कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिलाधिकारी के मुख्यालय से बाहर होने की वजह से इसमें अभी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
कोट
ब्लाक दुगड्डा के प्रधान ने मनरेगा में फर्जी तौर से करीब 28, 672 रुपये का गोलमाल किया है। विकलांग, पोस्टमैन, डीलर व अन्य को फर्जी तौर पर मजदूरी का भुगतान किया और स्वयं भी कुशल श्रमिक के तौर पर मनरेगा की धनराशि आहरित की। जांच में स्पष्ट होने के बाद प्रधान व अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई व वसूली की जाएगी।
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-एमएम खान, जिला पंचायत राज अधिकारी, पौड़ी।
मामला ब्लाक दुगड्डा के बिजनूर गांव का है। यहां के ग्राम प्रधान गणेश प्रसाद हैं। गणेश प्रसाद ने मनरेगा की धनराशि अधिक से अधिक अपने कब्जे में लेने का नायाब तरीका निकाला। वर्ष 2014-15 व 2015-16 में मनरेगा के तहत हुए निर्माण कार्यों में उन्होंने ऐसे लोगों के खातों में मनरेगा की धनराशि जमा की, जिन्होंने काम ही नहीं किया। गांव की दिव्यांग मायादेवी चल-फिर नहीं सकतीं, लेकिन उनके खाते में मनरेगा की मजदूरी जमा होती रही। गांव के ही चंद्रमोहन पुत्र सुुशील कुमार गांव के ही पोस्ट आफिस में पोस्टमैन हैं। इनके खाते में भी मजदूरी जमा होती रही। मोहन सिंह पुत्र फते सिंह राशन डीलर हैं। इनके द्वारा भी कोई कार्य नहीं किया गया, लेकिन मनरेगा की मजदूरी इसके खाते में भी जमा हुई। इसके अलावा गांव की टीमा देवी, सरोजनी देवी, खुशाल सिंह, उनका बेटा प्रदीप सिंह और सुशील के खातों में भी बिना कार्य के पैसा जमा होता रहा। इतना ही नहीं, ग्राम प्रधान गणेश प्रसाद ने अपने को भी कुशल श्रमिक दर्ज कर मनरेगा की दिहाड़ी चट कर ली। इस मामले को लेकर गांव के ही वीरेंद्र प्रसाद काला ने सूचना आयोग में शिकायत की। शिकायत के बाद लोक सूचना अधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी एमएम खान को इसकी जांच सौंपी। डीपीआरओ ने जांच में यह खुलासा करने के बाद कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिलाधिकारी के मुख्यालय से बाहर होने की वजह से इसमें अभी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
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कोट
ब्लाक दुगड्डा के प्रधान ने मनरेगा में फर्जी तौर से करीब 28, 672 रुपये का गोलमाल किया है। विकलांग, पोस्टमैन, डीलर व अन्य को फर्जी तौर पर मजदूरी का भुगतान किया और स्वयं भी कुशल श्रमिक के तौर पर मनरेगा की धनराशि आहरित की। जांच में स्पष्ट होने के बाद प्रधान व अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई व वसूली की जाएगी।
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-एमएम खान, जिला पंचायत राज अधिकारी, पौड़ी।