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व्हीलचेयर पर भी नहीं छोड पाया फुटबॉल का रोमांच
अमर उजाला, रवींद्र पांडे रवि, नैनीताल
Updated Tue, 03 Sep 2013 10:30 PM IST
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समाज में ऐसे कई लोग हैं जो दुनिया जीतने का दम रखते हैं। दिल्ली निवासी गुलबीर सिंह भाटी भी एक मिसाल हैं।
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दोनों पैरों से विकलांग होने के बावजूद फुटबॉल के प्रति उनका जुनून फुटबॉल खिलाडियों के लिए प्रेरणा से कम नहीं। 12 साल पहले एक हादसे में दोनों पैर गंवा चुके फुटबॉलर भाटी इन दिनों नैनीताल में अपनी टीम लेकर पहुंचे हैं।
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खुद व्हील चेयर पर हैं। शरीर से यूरो बैग चिपका हुआ है, लेकिन शारीरिक दर्द के आगे जुनून ने कभी घुटने नहीं टेके। रामपुर कप फुटबॉलप्रतियोगिता में ‘हंस पंजाब हीरोज दिल्ली’ की टीम के कोच/मैनेजर के तौर पर वह खिताब झटकने यहां आए हैं।
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क्षेत्ररक्षण में माहिर
डीएसए मैदान में जब खिलाड़ी के पैरों पर फुटबॉल नाचती है तो गुलबीर के भीतर एक ताकत पैदा होती है। उनकी कहानी की तरफ जाएं तो अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिताओं में क्षेत्ररक्षण के दमदार खिलाड़ी रह चुके भाटी ने 26 जनवरी 2001 में एक हादसे में अपने दोनों पैर खो दिए थे।
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एम्स के इंजीनियरिंग विभाग में तैनात गुलबीर के प्रयासों से ही 1996-97 में दिल्ली स्पोर्ट्स एसोसिएशन में एम्स का रजिस्ट्रेशन हुआ था।
अपने खर्च पर लाते हैं टीम
तब से एम्स की टीम देश के विभिन्न प्रांतों में प्रतिभाग कर रही है। एम्स में टीम कैप्टन रहे भाटी अपने खर्च पर टीम को यहां लाए हैं। वेतन से पैसे बचाकर वह खेल में खर्च करते हैं।
उनका कहना है कि उनकी टीम में 18 में से 14 खिलाड़ी उत्तराखंड के ही हैं। यदि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को सुविधा दे तो उन्हें मदद मिलेगी।