उत्तराखंड: बागियों की सदस्यता पर सुनवाई सोमवार तक टली
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उत्तराखंड के बागी विधायकों की सदस्यता पर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई सोमवार तक के लिए टल गई है। दोपहर में नैनीताल हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की कोर्ट में स्पीकर द्वारा बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के फैसले पर सुनवाई शुरू हुई।
सुनवाई शुरू होते ही बागियों के वकील ने अपना पक्ष रखने के लिए सोमवार तक का वक्त मांगा जिसका स्पीकर के वकील कपिल सिब्बल ने विरोध किया। सिब्बल ने कहा कि बागियों की सदस्यता समाप्त करने का विधानसभा अध्यक्ष का फैसला सही है। इसके बाद सुनवाई दो बजे तक रोक दी गई।
दो बजे याचिका पर दोबारा सुनवाई शुरू हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने बागियों को सोमवार तक का वक्त देते हुए मामले की सुनवाई टाल दी। अब अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
बता दें, विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल ने 27 मार्च को आदेश जारी कर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सहित नौ बागी विधायकों की सदस्यता निरस्त कर दी थी। हाईकोर्ट ने भी इस फैसले पर अपनी मोहर लगाई थी। बागियों ने स्पीकर के उसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
भाजपा विधायक की सदस्यता पर भेदभाव का आरोप
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ में दाखिल याचिका में कहा गया है कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी बल्कि केवल सरकार के खिलाफ गए थे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक भीमलाल आर्य की सदस्यता खत्म करने के मामले में स्पीकर भेदभाव बरत रहे हैं।
इससे पहले स्पीकर ने अपने जवाब में कहा था कि उत्तराखंड विधानसभा में 18 मार्च को विनियोग विधेयक सदन संचालन की नियमावली व संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पारित हुआ था।
स्पीकर ने किया अपना जवाब दाखिल
दलबदल कानून के तहत सुनवाई का पर्याप्त अवसर देकर बागी विधायकों पर कार्रवाई की गई। पूर्व में दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में स्पीकर ने विगत सोमवार को अपना जवाब दाखिल कर दिया था। कोर्ट ने इस प्रकरण पर अगली सुनवाई के लिए 23 अप्रैल की तिथि नियत की थी।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री विजय और कांग्रेस के बागी विधायक विजय बहुगुणा का कहना है कि उनकी सदस्यता जिस आधार पर खत्म की जा रही वह गलत है।