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आसाराम: कैसे और कहां के संत, पढ़िए पूरी कहानी
अमर उजाला, कौशल सिखौला, हरिद्वार
Updated Sat, 31 Aug 2013 11:26 AM IST
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विवादों में घिरे आसाराम खुद को कभी-कभी भगवान भी बताने से गुरेज नहीं करते लेकिन संतों की सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद उन्हें संत मानने ही इनकार करती है। हरिद्वार के प्रसिद्ध संत टाट वाले बाबा से कभी दीक्षा लेने की मांग करने वाले आसाराम का वस्तुत: हरिद्वार के संतों और अखाड़ों से कोई संबंध नहीं रहा।
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इसलिए हरिद्वार के संत जगत में उनके समर्थक नहीं हैं। अलबत्ता, हरिद्वार के हरिपुर कलां में आसाराम ने अपना शानदार आश्रम बनवा रखा है। लेकिन मौजूदा घटना के बाद वहां इक्के-दुक्के अनुयायी ही नजर आ रहे।
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न वह संतों को न्योता देते हैं, न कोई उन्हें बुलाता है
आसाराम अपने किसी भी आयोजन में हरिद्वार के संतों को न्योता नहीं देते। धर्मनगरी में बड़े-बड़े संत सम्मेलन होते रहे हैं, मार्गदर्शक मंडल की बैठकें हुई, रामजन्म भूमि न्यास के मंच सजे हैं, धर्मसंसदों के आयोजन किए गए हैं किंतु आसाराम कभी नहीं आए।
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अखाड़ों से तो उनका कोई रिश्ता ही नहीं रहा। यही वजह है कि जब उन पर संकट आया, तो उनके समर्थन में हरिद्वार से एक भी आवाज नहीं उठी। अभा संत समिति व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगम्बर ने तो उन्हें संत मानने से ही इंकार कर दिया। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि भी मानते हैं कि आसाराम बापू से संतों का कोई लेना-देना न कभी रहा और न अब है।
हर ज्येष्ठ पूर्णिमा को हरिद्वार में होते हैं आसाराम
विवादों में फंसे आसाराम वर्ष में एक बार हरिद्वार आते हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा से दो दिन पूर्व पंतद्वीप में उनका सत्संग होता है और देशभर से आने वाले लाखों पूनम व्रत धारी पूर्णिमा के दिन उनका दर्शन कर व्रत खोलते हैं। इस बार भी तीर्थ नगरी में आए थे। उनके प्रवचनों में भी स्थानीय जन नहीं जाते। प्रवचन सुनने के लिए भी बाहर से ही श्रद्धालु आते हैं।
हरिद्वार कनेक्शन
हर वर्ष पूर्णिमा पर हरिद्वार आते हैं आसाराम।
हरिद्वार के संत जगत से कोई नाता नहीं।
न किसी को बुलाते, न किसी के आश्रम जाते।
हरिद्वार के संत अखाड़ों से नहीं रहा लेना-देना।