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रोजी छिनी, अब जिंदगी दांव पर
शेषमणि शुक्ल
Updated Tue, 25 Jun 2013 10:09 AM IST
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केदारनाथ घाटी। घाटी में 16 को आई जल प्रलय में अपनी रोजी-रोटी कमाने के साधन खो चुके ग्रामीणों के सामने अब जिंदगी का संकट है। सीतापुर, रामपुर गांव और सारा, भटभुंगा, न्यालसू तोक के 350 परिवारों का हर दूसरा सदस्य डायरिया ने पीड़ित है।
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उक्त गांवों में बसे परिवार यात्रा सीजन के दौरान केदारनाथ क्षेत्र में खच्चर चलाकर या फिर होटल और चायपान की दुकानें लगाकर सालभर के खाने का इंतजाम करते हैं। जल प्रलय ने इनकी रोजरोटी का साधन छीन लिया है। ये ग्रामीण इस संकट से उबर भी नहीं पाए कि उनके सामने जिंदा रहने का सवाल खड़ा हो गया है।
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उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
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दरअसल, इन गांवों में डायरिया ने अपने पांव पसार लिए हैं। क्षेत्र में इलाज के लिए एकमात्र रामपुर स्थित सरकारी डिस्पेंसरी का ही सहारा है। आलम यह है कि यहां यात्रा सीजन के बाद भी सरकार ने किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं की। एक मात्र फार्मासिस्ट के सहारे चल रही इस डिस्पेंसरी में दवाएं भी खत्म हो गई हैं।
सूचना पर पहुंची एनडीआरएफ की टीम के डॉ. अमित मुरारी ने ने डिस्पेंसरो जरूरी दवाएं उपलब्ध करा दी हैं। आपदा के बाद दून अस्पताल के डॉक्टर सुरेश कोठियाल को गुप्तकाशी भेजा गया था। पीड़ित ग्रामीण शनिवार को गुप्तकाशी पहुंचे और डॉ. कोठियाल को अपने साथ इस डिप्पेंसरी में ले आए हैं।
पीड़ित मरीजों का इलाज किया गया
सोमवार को अमर उजाला संवाददाता इस डिस्पेंसरी में पहुंचा। देखा कि मरीजों को एक होटल के कमरे में लिटाकर उनका उपचार किया जा रहा है। पुष्पा देवी, शांता देवी, परमेश्वरी और सोनी को डिप चढ़ाई जा रही थी। 350 लोग दवा लेकर जा चुके थे। शनिवार को यहां एक सौ, रविवार को 125 और सोमवार को 175 डायरिया पीड़ित मरीजों का इलाज किया गया।
ग्रामीणों की शिकायत है कि दवा लेकर गए लोगों की हालत में कोई खास सुधार नहीं है। ग्रामीणों को संक्रमण से बचाने के लिए पर्याप्त इलाज की जरूरत है।
पेयजल हो रहा प्रदूषित
घाटी में पड़े शव सड़ने से पेयजल प्रदूषित हो रहा है और उठ रही दुर्गन्ध महामारी जैसे हालात पैदा कर रही है। शवों के सड़ने की वजह से मख्खियां बेइंतहा बढ़ गई हैं और इनकी वजह से संक्रमण तेजी से फैल रहा है। प्रदूषित पेयजल से समस्या विकराल रूप लेती जा रही है।
नौबत भुखमरी तक पहुंची
इन गांवों में लोगों के पास खाद्यान्न समाप्त हो गया है। रास्ते बंद होने से न तो राशन आ रहा है और न ही सब्जियां। ग्रामीणों का कहना है कि स्टोर किया गया सारा खाद्यान्न तीर्थयात्रियों को खिला दिया।
उनके पास अब कुछ नहीं बचा है। ग्राम न्यलसू के वीरेंद्र सिंह ने बताया कि रामपुर में बने सरकारी गोदाम में खाद्यान्न रखा है। वे लोग गुप्तकाशी जाकर एसएसडीएम को गांव में खाद्यान्न खत्म होने की बात बता चुके हैं। लेकिन प्रशासन ने उनकी कोई बात नहीं सुनी।
डीजल-पेट्रोल भी खत्म
केदारघाटी जाने वाले सभी रास्ते बंद होने से क्षेत्र में डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे संचार माध्यम को लगे टॉवरों के जनरेटर नहीं चल पा रहे हैं। नतीजा यह है कि संचार व्यवस्था ही पूरी तरह चरमरा गई है। ग्रामीणों को केरोसिन या मोमबत्ती की आपूर्ति भी नहीं जा रही है। इससे लोगों को अंधेरे में ही रात काटनी पड़ रही है।