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एनएचएम: डॉक्टरों की फौज, कर रही मौज
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 08 Apr 2016 10:44 AM IST
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों के निरीक्षण को पहुंची सेंट्रल रिव्यू मिशन (सीआरएम) की टीम ने उत्तराखंड में मिशन के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।
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टीम में शामिल सदस्यों का कहना है कि पहाड़ पर डॉक्टरों की कमी से मरीज इलाज को तरस रहे हैं, लेकिन विभाग ने मिशन के नाम पर कई डॉक्टरों को पहाड़ से उतारकर मुख्यालय में अटैच कर लिया। इसके साथ ही ना तो पूरा बजट खर्च हो पा रहा है और ना योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन हो रहा है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का प्रदेश में काम करने का तरीका पूरे देश से अलग है। प्रदेश में एनएचएम के क्रियान्वयन के लिए 12 डॉक्टरों की टीम बनाई गई है। इनको अलग-अलग अस्पतालों से निदेशालय लाया गया है। जानकारों की मानें तो इनमें से कुछ डॉक्टरों को केवल दून लाने के लिए ही टीम में शामिल किया गया। अब यह लोग मिशन के गले की हड्डी बन गए हैं।
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30 और 31 मार्च को दून पहुंचे सेंट्रल रिव्यू मिशन के अपर सचिव सीके मिश्रा ने मिशन के कामकाज को लेकर खासी नाराजगी जताई। सूत्रों के अनुसार उन्होंने मिशन के अधिकारियों को जमकर लताड़ भी लगाई। उन्होंने मसूरी में 2010 से बन रहे 50 बेड के अस्पताल की सुस्त निर्माण गति पर भी सवाल उठाए।
साथ ही मसूरी अस्पताल में मरीजों की बेहद कम संख्या को लेकर भी नाराजगी जताई। प्रदेश के अन्य अस्पतालों में भी एनएचएम का कामकाज बेहतर नहीं होने पर उन्होंने नाखुशी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी-भरकम फौज के बावजूद योजनाओं पर काम ना होने पर घोर आपत्ति जताई।
खर्च नहीं हो रहा बजट
सेंट्रल रिव्यू मिशन ने वार्षिक बजट खर्च नहीं करने पर अधिकारियों को लताड़ लगाई है। प्रदेश में अभी तक निर्धारित अवधि में एक बार भी स्वीकृत बजट खर्च नहीं हुआ है। पिछले कई वर्षों से ऐसा चल रहा है। इससे संभावना जताई जा रही है कि इस वित्तीय वर्ष के बजट पर भी कैंची चल सकती है। प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन प्लान में भी कटौती हो सकती है।
सेंट्रल रिव्यू मिशन ने कामकाज को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं। दिए गए निर्देशों के अनुसार कामकाज को व्यवस्थित करने की दिशा में काम किया जाएगा। कमियों में सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे।
- डॉ. अजीत गैरोला, निदेशक, एनएचएम