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Nainital News: कुमाऊंनी व्यंजन परोस आर्थिकी मजबूत कर रहे महिला समूह
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व्यंजन तैयार करतीं महिलाएं।
हल्द्वानी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित महिला समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने की सरकार की पहल रंग ला रही है। महिला समूह शहर में सरकारी कार्यालयों के आसपास कैंटीन (भोजनालय) संचालित कर रही हैं। इससे महिला समूहों की आर्थिकी में सुधार हो रहा है। कैंटीन में परोसे जाने वाले व्यंजन भी लोगों को खूब भा रहे हैं।
शहर में सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम कार्यालय परिसर में पिछले दो साल से हार्दिक स्वयं सहायता समूह कैंटीन का संचालन कर रहा है। समूह की अध्यक्ष कविता चिलवाल और कोषाध्यक्ष कला कम दाम पर लोगों को नाश्ते के साथ भोजन भी परोस रही हैं। कविता ने बताया कि दो साल पहले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह ने उन्हें कैंटीन के लिए स्थान उपलब्ध कराया था। तब से वह नियमित रूप से कैंटीन का संचालन कर रही हैं। कैंटीन में दाल चावल के अलावा भट की चुड़कानी, डुबके, आलू के गुटके, मडुवे की रोटी की खूब मांग रहती है।
कोरोनाकाल में बनाए मास्क, अब बना रहीं आचार और जूट के बैग
महिला समूह की कविता चिलवाल बताती हैं कि उनके समूह से दस महिलाएं जुड़ी हुई हैं। कोरानाकाल में उन्होंने घर पर रहकर मास्क बनाए। अब समूह की महिलाएं आचार, पापड़, जूस, जैम, जूट के बैग आदि बना रही हैं। उन्होंने बताया कि होली पर हर्बल रंग और रक्षाबंधन में राखी भी तैयार करती हैं।
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पार्किंग भी संचालित कर रही हैं महिलाएं
समूहों से जुड़ी महिलाएं घरेलू उत्पाद निर्मित करने के साथ पार्किंग स्थलों का भी बखूबी संचालन कर रही हैं। यहां एसडीएम कोर्ट और तहसील में स्थित पार्किंग का संचालन महिला समूहों से जुड़ी महिलाएं ही करती हैं। इससे पूर्व इन पार्किंग स्थलों को निजी लोगों को ठेके पर दिया जाता था।
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शहर में सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम कार्यालय परिसर में पिछले दो साल से हार्दिक स्वयं सहायता समूह कैंटीन का संचालन कर रहा है। समूह की अध्यक्ष कविता चिलवाल और कोषाध्यक्ष कला कम दाम पर लोगों को नाश्ते के साथ भोजन भी परोस रही हैं। कविता ने बताया कि दो साल पहले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह ने उन्हें कैंटीन के लिए स्थान उपलब्ध कराया था। तब से वह नियमित रूप से कैंटीन का संचालन कर रही हैं। कैंटीन में दाल चावल के अलावा भट की चुड़कानी, डुबके, आलू के गुटके, मडुवे की रोटी की खूब मांग रहती है।
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कोरोनाकाल में बनाए मास्क, अब बना रहीं आचार और जूट के बैग
महिला समूह की कविता चिलवाल बताती हैं कि उनके समूह से दस महिलाएं जुड़ी हुई हैं। कोरानाकाल में उन्होंने घर पर रहकर मास्क बनाए। अब समूह की महिलाएं आचार, पापड़, जूस, जैम, जूट के बैग आदि बना रही हैं। उन्होंने बताया कि होली पर हर्बल रंग और रक्षाबंधन में राखी भी तैयार करती हैं।
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पार्किंग भी संचालित कर रही हैं महिलाएं
समूहों से जुड़ी महिलाएं घरेलू उत्पाद निर्मित करने के साथ पार्किंग स्थलों का भी बखूबी संचालन कर रही हैं। यहां एसडीएम कोर्ट और तहसील में स्थित पार्किंग का संचालन महिला समूहों से जुड़ी महिलाएं ही करती हैं। इससे पूर्व इन पार्किंग स्थलों को निजी लोगों को ठेके पर दिया जाता था।