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अपराधियों को सजा देने में देरी क्यों

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Thu, 05 Dec 2019 01:45 AM IST
हल्द्वानी में रविवार को अमर उजाला परिसर में अपराजिता के तहत आयोजित ‘आखिर कब तक निर्भया’ विषय पर ह
हल्द्वानी में रविवार को अमर उजाला परिसर में अपराजिता के तहत आयोजित ‘आखिर कब तक निर्भया’ विषय पर ह
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हल्द्वानी। हैदराबाद की घटना को लेकर महिलाओं में आक्रोश काफी बढ़ गया है। शहर की प्रबुद्ध महिलाओं ने सवाल उठाए कि अपराधियों द्वारा गुनाह कबूलने के बावजूद उन्हें सजा देने में देरी क्यों हो रही है। सजा तत्काल मिलने पर ही अन्य अपराधी डरेंगे। महिला हिंसा को रोकने के लिए पुलिस को भटकाने वाला रास्ता छोड़ना होगा। सूचना मिलने पर पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो मातृ शक्ति एकजुट होकर सिस्टम को ठीक करने के लिए सड़क पर संघर्ष करेंगी। महिलाओं ने बुधवार को अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के बैनर तले आखिर कब तक निर्भया पर संवाद कार्यक्रम में उक्त विचार व्यक्त किया।
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सजा देने के लिए रोज सुनवाई करे कोर्ट
फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोज सुनवाई होनी चाहिए, ताकि दोषियों को शीघ्र कड़ी सजा मिले। निर्भया कांड में अपराधियों को सजा मिलने में देर होने से देश की महिलाएं निराश हैं। -रश्मि पंत, निर्वाण अस्पताल की प्रमुख।
रेप के आरोपी फांसी के हकदार
रेप के आरोपी फांसी के हकदार हैं। देश में प्रत्येक दिन छह रेप होते हैं। इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए युवकों को शिक्षित करें। जनसंख्या नियंत्रण को कानून बनाकर लागू करें। -कनक चंद, आनंद आश्रम की अध्यक्ष।
सही समय पर सही सजा मिले
सही समय पर सही सजा (राइट पनिशमेंट राइट टाइम) दोषियों को मिले। सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में कार्यशाला भी होनी चाहिए। माता-पिता को लड़कों पर ज्यादा ध्यान और संस्कार देने की जरूरत है। -इति बिष्ट घरेलू महिला।
अपराधियों का अंग-भंग करना होगा
अपराधियों को फांसी की जगह अंग-भंग कर देना चाहिए, ताकि वे जीवन पर तड़पते रहें। ऐसे लोगों की हालत देखकर दूसरा अपराध करने की जुर्रत न करे। सामूहिक रेप एक प्रकार की विकृति है। बच्चों के अंदर की विकृति निकालने के लिए काउंसलिंग होनी चाहिए। -डॉ. संध्या गड़कोटी, असिस्टेंट प्रोफेसर
बच्चों की काउंसलिंग जरूरी
बच्चों को अपराध से बचाने के लिए उनकी काउंसलिंग जरूरी है। मनोवैज्ञानिक परीक्षण से ही समाज को सुधारा जा सकता है। रेप के आरोपियों को समय देना ठीक नहीं है। -डॉ. निर्मला लोहनी, असिस्टेंट प्रोफेसर
पुरस्कार देने वाले भी बुरी नजर से देखते
बेटी तो समाज में जन्म से अभिशाप बन गई है। पुरस्कार देने वाला भी उसे बुरी नजर से देखता है। इस मामले में लगातार सोचने और कार्य करने की जरूरत है। अपराध का बड़ा कारण नशा है। दूसरी, पुरुषों की बुरी मानसिकता, महिलाओं का कमजोर आत्मविश्वास है। लचर कानून से भी अपराध बढ़ रहे हैं। -गुंजन अरोड़ा, समाजसेविका
शराब पीने वाले करते हैं छेड़खानी
शराब पीने वाले लड़कियों को छेड़ते हैं। पुलिस शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करती है। शरारती तत्व अड्डे बनाकर रहते हैं। इस मामले में पुलिस के सिस्टम को ठीक करने की जरूरत है। -मोनिका, वीरांगना सदस्य
बेटियों का साथ नहीं देते परिजन
अपराधियों में कानून का डर नहीं है। कोई घटना होेने पर परिवार के लोग भी बेटियों का साथ नहीं देते हैं। परिजन लोकलाज से भयभीत रहते हैं। इसी कारण अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। -जया पांडे, निर्भया काउंसलर
हर मोड़ पर लगे सीसीटीवी
देश में सजा का प्रतिशत लगातार कम हो रहा है। घटना के 24 घंटे के अंदर पुलिस मेडिकल नहीं कराती है। एफआईआर मेें देर करती है। नए आदेश के तहत अब पीड़िता सीधे मेडिकल करा सकती है। उन्नाव रेप कांड में राजनीतिक रसूख के चलते मेडिकल कराने में देर की गई। अपराधियों को पकड़ने के लिए चीन की तरह हर मोड़ पर सीसीटीवी जरूरी होना चाहिए। दिल्ली में मेडिकल जांच के लिए एक कीट प्रदान किया गया है। -डॉ. श्रद्धा प्रधान, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
रेप के आरोपियों को तत्काल फांसी दी जाए
रेप के आरोपियों को तत्काल फांसी की सजा मिले। घटना के बाद पुलिस आधी हिम्मत तोड़ देती है। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी जरूरी है। महिलाओं को एकजुट होकर फिर संघर्ष करना होगा। कानून लचीला है, लेकिन महिलाएं एक साथ उतरे तो किसी को भी झुकना पड़ेगा। -अमिता लोहनी, पूर्व उपाध्यक्ष महिला आयोग
लड़कों को शिक्षित करना जरूरी
यदि लड़कों को भी शिक्षित किया जाय तो वे लड़कियों से ईर्ष्या करना छोड़ देंगे। गलत और सही का भेद करेंगे। लड़कियों को सुरक्षा के लिए ताइक्वांडो और कराटे सिखाना चाहिए। -डॉ. ऋतु रखोलिया, बाल रोग विशेषज्ञ
पुलिस भटकाने का रास्ता छोड़े
शिकायत करने पर पुलिस दूसरे थाने में जाने की सलाह देती है। भागदौड़ में देरी से अपराधी भाग जाते हैं। महिलाओं को किसी थाने चौकी में शिकायत की छूट होनी चाहिए। बच्चों को सही गलत का भेद करना चाहिए। -दीप्ति खर्कवाल उपाध्यक्ष जागरूकता अभियान आनंद आश्रम
महिला संगठनों में एकता जरूरी
पुरुष प्रधान समाज में अभी परिवर्तन नहीं आया है। महिला संगठनों में एकता होनी चाहिए। बेटी को डांटकर चुप करा देते हैं। अपराध की जड़ नशा है। -पार्वती किरोला अध्यक्ष जागरूकता अभियान आनंद आश्रम
लड़कियों को अपनाना होगा आक्रामक रुख
ऊंचे और नीचे के समाज में गंदी मानसिकता ज्यादा है। हालात एक दिन में नहीं बदलेंगे। पुलिस को मदद करनी चाहिए। लड़कियों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। संघर्ष के लिए महिलाओं को आक्रामक रुख अपनाना होगा। -शुभ्रा कांडपाल असिस्टेंट प्रोफेसर
घरेलू हिंसा को देखकर बच्चे बिगड़ते हैं
समाज पूरा फोकस लड़कियों पर करता है। यदि बच्चा घर में मां के साथ घरेलू हिंसा देखता है तो उसके दिमाग पर असर पड़ता है। ऐसे बच्चे आपराधिक मनोवृत्ति के होते हैं। दूसरी तरफ पोर्नोग्राफी देखने पर बच्चों में विकृति आ जाती है। अभिभावकों को ध्यान देने की जरूरत है। -डॉ. बीना खंडूरी, प्राचार्या एमबीपीजी कॉलेज
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