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Nikay Chunav: नगर की सरकार बनाने में माननीयों के राजनीतिक कौशल की परीक्षा, इन छह विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर
Wed, 22 Jan 2025 11:42 AM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
Published by: हीरा मेहरा
Updated Wed, 22 Jan 2025 11:42 AM IST
सार
Uttarakhand Nikay Chunav: नैनीताल जिले के सात नगर निकायों का चुनाव प्रचार मंगलवार शाम थम गया है। अब 23 जनवरी को मतदान है। मेयर और चेयरमैन प्रत्याशियों को जिताने के लिए कांग्रेस का एक और भाजपा के पांच विधायक पसीना बहा रहे हैं।
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उत्तराखंड निकाय चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नैनीताल जिले के सात नगर निकायों का चुनाव प्रचार मंगलवार शाम थम गया। अब 23 जनवरी को मतदान है। मेयर और चेयरमैन प्रत्याशियों को जिताने के लिए कांग्रेस का एक और भाजपा के पांच विधायक पसीना बहा रहे हैं। ये चुनाव बेशक मेयर, चेयरमैन और पार्षदों के लिए हो रहे हैं लेकिन परीक्षा इन माननीयों की भी है। निकाय चुनाव के परिणामों से पता चलेगा कि अपने क्षेत्र में उनकी कितनी पकड़ है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी ये परिणाम माहौल बनाएंगे। जिले के तीन विधायकों के पास दो-दो निकायों को जिताने तो तीन विधायकों के पास एक- एक निकाय का जिम्मा है।
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बंशीधर भगत को दो जगह बचानी है साख
कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में हल्द्वानी नगर निगम के 16 वार्ड हैं। इनमें करीब 89000 मतदाता हैं। उधर, कालाढूंगी नगर पालिका तो विधायक बंशीधर भगत के विस क्षेत्र में है ही। ऐसे में उन्हें दो जगह अपनी साख बचानी है। उन्हें हल्द्वानी नगर निगम के उक्त वार्डों में प्रत्याशी को जीत दिलाने के साथ ही कालाढूंगी नगर पालिका का चुनाव भी जिताना है। हल्द्वानी से गजराज बिष्ट भाजपा प्रत्याशी हैं तो कालाढूंगी में कविता वालिया चेयरमैन प्रत्याशी हैं। हल्द्वानी में मेयर के लिए 10 उम्मीदवार चुनावी जंग में उतरे हैं।
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हल्द्वानी मेयर सीट जिताना सुमित की प्रतिष्ठा का सवाल
सुमित हृदयेश नैनीताल जिले में कांग्रेस के एकमात्र विधायक हैं। वह हल्द्वानी से एमएलए हैं। हल्द्वानी नगर निगम में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत उनकी प्रतिष्ठा का सवाल है। 60 वाडों वाले हल्द्वानी नगर निगम में 40 वार्ड उनके विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। इनमें करीब 1.37 लाख वोटर हैं। यहां ललित मोहन जोशी कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी हैं। हल्द्वानी मेयर सीट को कांग्रेस के पाले में करने से पता चलेगा कि उनकी अपने विस क्षेत्र में कितनी पकड़ है।
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लालकुआं में विधायक मोहन बिष्ट की होगी परीक्षा
लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के विधानसभा क्षेत्र में हल्द्वानी नगर निगम के चार वार्ड आते हैं। इनमें 18,061 मतदाता हैं। इनमें दो निवर्तमान पार्षदों के टिकट कटने के बाद लड़ाई दूसरे तरीके की हो चुकी है। उधर, लालकुआं नगर पंचायत में भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष प्रत्याशी प्रेमनाथ पंडित को भी जिताना होगा। एक तरह से बिष्ट की प्रतिष्ठा भी दो जगहों से जुड़ी है। यह चुनाव परिणाम लालकुआं में होने वाले पंचायत चुनाव पर भी असर डालेंगे। साथ ही शहरी क्षेत्र में भाजपा का वोट बैंक कितना बढ़ा या घटा, इसका भी पता चलेगा।
नैनीताल-भवाली में सरिता के कद का चलेगा पता
नैनीताल और भवाली नगर पालिका नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में आती है। इन दोनों पालिकाओं में भाजपा विधायक सरिता आर्या की प्रतिष्ठा दांव पर है। नैनीताल नगर पालिका का चुनाव कांग्रेस जीतते आई है। अब देखना होगा कि सरिता आर्या इस चुनाव को वहां भाजपा के पक्ष में कितना कर पाती हैं। नैनीताल में भाजपा से अध्यक्ष पद की प्रत्याशी जीवंती भट्ट और भवाली में प्रकाश आर्या बीजेपी से उम्मीदवार हैं। वहीं, नैनीताल में कांग्रेस की प्रत्याशी सरस्वती खेतवाल हैं तो भवाली में पंकज आर्य कांग्रेस उम्मीदवार हैं।
रामनगर विधायक के लिए अच्छा मौका
रामनगर नगर पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव भाजपा कभी नहीं जीती है। यहां कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव जीतता रहा है। अबकी यहां पालिका चुनाव रोचक हो गया है। कांग्रेस ने यहां किसी को टिकट नहीं दिया है। कांग्रेस के दिग्गज अलग- अलग प्रत्याशी के लिए प्रचार कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा विधायक दीवान सिंह विष्ट की यह परीक्षा है कि वह इस माहौल में अपने पार्टी प्रत्याशी मदन जोशी को जिता पाते हैं या नहीं। उनके काम का हिसाब भी यहां जनता देगी। वैसे उनके लिए इस बार यहां भाजपा को जिताने का अच्छा मौका है।
भीमताल विधायक कैड़ा की भी कड़ी परीक्षा
भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा आठ साल से यहां से भाजपा का चेहरा हैं। उनके क्षेत्र में एक ही निकाय है भीमताल पालिका। यहां कांग्रेस की प्रत्याशी सीमा टम्टा और भाजपा प्रत्याशी कमला आर्य के बीच सीधा मुकाबला है। कैड़ा के लिए अपनी पार्टी के प्रत्याशी को जिताने की कड़ी परीक्षा है। नगर पंचायत से नगर पालिका में बदला यह निकाय जिताना उनके लिए चुनौती भरा है, क्योंकि पिछली बार यहां कांग्रेस ने बाजी मारी थी। इस बार देखना होगा कि जनता किसके सिर जीत का सेहरा बांधती है।