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नई शिक्षा नीति:...कहीं लागू तो कहीं अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ी, मनमुताबिक विषय का चयन नहीं कर पा रहे विद्यार्थी

Mon, 12 Aug 2024 03:47 PM IST
हीरा मेहरा दीपक कापड़ी, संवाद
दीपक कापड़ी, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 12 Aug 2024 03:47 PM IST
सार

नई शिक्षा नीति कहीं लागू तो कहीं अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई है। एकल विषय वाले महाविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी मन मुताबिक विषयों का चयन नहीं कर पा रहे हैं। नई शिक्षा नीति में छात्र-छात्रओं को तीन मुख्य विषय लेने अनिवार्य हैं।

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Uttarakhand News: new education policy was implemented at some places but suffered from chaos at some places
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : एक्स

विस्तार

नई शिक्षा नीति कहीं लागू तो कहीं अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई है। एकल विषय वाले महाविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी मन मुताबिक विषयों का चयन नहीं कर पा रहे हैं। नई शिक्षा नीति में छात्र-छात्रओं को तीन मुख्य विषय लेने अनिवार्य हैं। दो विषय वह अपने संकाय से ले सकता है और तीसरा विषय किसी भी संकाय से ले सकता है जिसमें उसे दिलचस्पी हैं, लेकिन प्रदेश के 35 ऐसे महाविद्यालय हैं जहां सिर्फ एकल संकाय संचालित हो रहे हैं। ऐसे में हजारों विद्यार्थी मन मुताबिक विषय नहीं ले पा रहे हैं। ये व्यवस्था उन महाविद्यालयों में भी लागू नहीं हो पा रही है जहां संकाय तो हैं पर प्राध्यापक नहीं।

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नई शिक्षा नीति में यह प्रावधान किया गया था कि कला संकाय का विद्यार्थी साइंस या कॉमर्स का विषय भी पढ़ सकता है। इस तरह की व्यवस्था बनाई गई थी कि विज्ञान, कला, कॉमर्स ग्रुप के विद्यार्थी स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश के समय अपने संकाय से दो मुख्य विषय का चयन कर सकता है। तीसरा मुख्य विषय छात्र-छात्राएं किसी भी संकाय से ले सकता हैं जिसमें उन्हें विशेष रुचि है। यह व्यवस्था उन कॉलेज में पटरी पर चल रही हैं जहां सारे विषय और प्राध्यापक हैं। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने संकाय के दो मुख्य विषयों के साथ दूसरे संकाय का कोई भी मुख्य विषय लेकर पढ़ रहे हैं।

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ये हैं एकल संकाय वाले महाविद्यालय
राजकीय महाविद्यालय दोषापानी, कोटाबाग, रामगढ़, मालधनचौड़, भतरौंजखान, पतलोट, लमगड़ा, नारायणबगड़, गदरपुर, जसपुर, गंगोलीहाट, पाटी, खिर्सु, खानपुर, मोरी, मिठीबेरी समेत प्रदेश के करीब 35 महाविद्यालयों में सिर्फ कला संकाय की ही पढ़ाई होती है। ऐसे में यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी तीनों विषय एक ही संकाय के लेने को मजबूर हैं। कई ऐसे महाविद्यालय भी हैं जहां प्राध्यापकों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। वहां यह व्यवस्था नहीं चल पा रही है।

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600 पद चले रहे रिक्त
प्रदेश के 119 महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के करीब 600 पद रिक्त चल रहे हैं। रिक्त पदों पर अतिथि प्राध्यापकों की तैनाती की जा रही है लेकिन स्थानांतरण के बाद अतिथि शिक्षक भी प्रभावित हो रहे हैं। स्थायी प्राध्यापक के आने पर उन्हें महाविद्यालयों से हटना पड़ रहा है। हालांकि उन्हें दूसरे महाविद्यालयों में भेजा जा रहा है जहां पद रिक्त चल रहे हैं।

प्रदेश के जिन महाविद्यालयों में एकल संकाय चल रहे हैं वहां नए संकाय डिमांड मिलने पर खोले जाएंगे। वर्तमान में ऐसी कोई डिमांड नहीं मिली है।
-डॉ. अंजू अग्रवाल, निदेशक उच्च शिक्षा हल्द्वानी

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