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उत्तराखंड: हत्या व आगजनी के दोषी को किया बरी, हाईकोर्ट ने कहा- मजबूत संदेह दोषसिद्धि का आधार नहीं

Thu, 01 Oct 2026 10:36 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Thu, 01 Oct 2026 10:36 PM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने हत्या, आगजनी और साक्ष्य मिटाने के मामले में निचली अदालत से मिली उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई की। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए साक्ष्य के अभाव में अपीलकर्ताओं को बरी कर दिया।

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Uttarakhand High Court verdict in case of murder, arson and destruction of evidence
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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नैनीताल हाईकोर्ट ने हत्या, आगजनी और साक्ष्य मिटाने के मामले में निचली अदालत से मिली उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के बाद निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए अपीलकर्ताओं को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार सत्र न्यायालय रूद्रप्रयाग ने वर्ष 2018 में अपीलकर्ता मुकेश थपलियाल को हत्या के अपराध में उसे आजीवन कारावास सहित अन्य धाराओं में सजा सुनाई थी। अभियोजन के अनुसार 27 अगस्त 2016 को विमला देवी की घर में आग लगने से मौत हो गई थी। जांच के दौरान अभियोजन ने अपीलकर्ता पर हत्या और घर में आग लगाने का आरोप लगाया था। इस मामले में 11 गवाह पेश किए गए थे। अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि यह पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित था और किसी भी अभियोजन गवाह ने आरोपी को घटना के समय मौके पर घर में आग लगाते या विमला देवी की हत्या करते नहीं देखा था। अदालत ने माना कि अभियोजन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी पूरी कड़ी स्थापित नहीं कर सका, जिससे आरोपी के अलावा किसी अन्य संभावना को पूरी तरह बाहर किया जा सके।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन का मामला मुख्यतः सुनी-सुनाई बातों पर आधारित था। अदालत ने सात वर्ष पुराने कथित विवाद को हत्या का पर्याप्त आधार मानने पर भी सवाल उठाया। अदालत ने बरामदगी को भी आरोपी के खिलाफ निर्णायक साक्ष्य नहीं माना।

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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संदेह, चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो दोषसिद्धि का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए 24 फरवरी 2018 के सत्र न्यायालय के फैसले को निरस्त कर दिया और अपीलकर्ता मुकेश थपलियाल को आरोपों से बरी कर दिया।

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