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उत्तराखंड: नैनीताल-कालाढूंगी रोड पर प्लास्टिक कचरे को लेकर हाईकोर्ट सख्त, कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट
Wed, 16 Sep 2026 10:58 PM IST
Heera
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
Published by: Heera
Updated Wed, 16 Sep 2026 10:58 PM IST
सार
नैनीताल हाईकोर्ट ने नैनीताल से कालाढूंगी तक सड़क के किनारे संचालित फड़, खोखे, दुकानों, होम स्टे और होटलों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को जंगल और जल स्रोतों के पास फेंके जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने नैनीताल से लेकर कालाढूंगी तक रोड के किनारे संचालित फड़ खोखे , दुकानों, होम स्टे और होटलों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को जंगल और जल स्रोतों के पास फेंके जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कमिश्नर से कहा है कि राज्य सरकार ने जो पूर्व के आदेश पर अनुपालन रिपोर्ट पेश कि है जिसमें कहा गया की कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए सारा अतिक्रमण हटा दिया गया है।
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एक बार इसका दोबारा से रूसी बाईपास तक देखकर कोर्ट को अवगत कराएं। कोर्ट ने फड़, फूड वैन और अन्य संचालकों को चेतावनी दी है कि अगर उनके द्वारा कोई गंदगी फैलाई जाती है तो इन्हे बंद करने के आदेश दे दिए जाएंगे। सुनवाई पर राज्य सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि कोर्ट के आदेश का प्रशासन ने पूरी तरह से अनुपालन कर लिया है। सभी अतिक्रमण हटा दिया गया है, जिस पर कोर्ट कमिश्नर ने अतिक्रमण के संबंध में सुबह के फोटोग्राफ कोर्ट में पेश कर कहा कि अभी भी वही स्थिति है जो कि पूर्व में थी। जिस पर कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर से कहा कि वे इसका दोबारा से मौका मुआयना करें और अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
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मामले के अनुसार अधिवक्ता ललित मिगलानी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नैनीताल से लेकर कालाढूंगी तक रोड के किनारे कई फड़ खोखे, दुकानें, होटल और होम स्टे संचालित है, जिनसे निकलने वाले वेस्ट को जंगल और जल स्रोतों में डाला जा रहा है। जिसकी वजह से सड़ियाताल, खुर्पाताल और अन्य जल स्रोत प्रदूषित हो रहे है। यहां पर रहने वाले लोगों जानवरो को प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है। होटल व्यवसायियों और होम स्टे संचालकों के द्वारा पीसीबी के मानकों को पूरा न करके उनसे निकलने वाला सीवरेज को खुले में डाला जा रहा है। इसलिए इनसे पीसीबी का मानको को पूरा करने के निर्देश दिए जाए, तभी इन्हें संचालित करने की अनुमति दी जाए जब ये पीसीबी और उच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए मानकों और दिशा निर्देशों का अनुपालन करें।
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सुनवाई पर नगरपालिका नैनीताल की ओर से कोर्ट को अवगत कराया कि नारायण नगर से उपर का क्षेत्र नगरपालिका के अंतर्गत आता है उससे नीचे का क्षेत्र नगर पंचायत में आता है, जो उनके क्षेत्र में नही आता है।