उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने मसूरी होटल के खिलाफ पीसीबी को कार्रवाई से रोका, नई सुनवाई के निर्देश दिए
नैनीताल हाईकोर्ट ने मसूरी के होटल टूरिस्ट होम पर लाखों रुपये के पर्यावरण क्षतिपूर्ति के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) को दोबारा सुनवाई करने का निर्देश दिया है।
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नैनीताल हाईकोर्ट ने मसूरी के होटल टूरिस्ट होम पर लगाए गए लाखों रूपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति के मामले में पीसीबी को दोबारा सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि होटल संचालक को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद ही नया आदेश पारित किया जाए, तब तक बोर्ड होटल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने होटल की ओर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ता ने पीसीबी के 16 अक्टूबर 2025 के नोटिस को चुनौती देते हुए कहा था कि पीसीबी की ओर से उस पर सुनवाई का मौका दिए बिना 9,78,750 रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई गई है। याचिकाकर्ता इस मामले में पहले एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली पहुंचा। एनजीटी ने 17 अप्रैल 2025 को पूर्व में जारी नोटिस को निरस्त करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन कर नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए। इसके बाद बोर्ड ने 27 मई 2025 को नया नोटिस दिया और होटल के जवाब के बाद 16 अक्टूबर 2025 को नोटिस जारी किया।
होटल की ओर से यह भी कहा गया कि उसने 20 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन सुनवाई का अवसर दिए बिना ही आदेश पारित कर दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है। पीसीबी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि होटल की 20 जुलाई 2026 की प्रत्यावेदन पर व्यक्तिगत सुनवाई के बाद निर्णय लिया जाएगा और तब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।