Uttarakhand High Court: कॉर्बेट नेशनल पार्क प्रशासन को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, जानें पूरा मामला
हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने कॉर्बेट नेशनल पार्क में जिप्सी पंजीकरण प्रक्रिया 2023 में पारदर्शी तरीके से करने के मामले में दो प्रमुख अखबारों में विज्ञापन निकालकर सभी योग्य आवेदकों को मौका देने के आदेश दिए हैं।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने कॉर्बेट नेशनल पार्क में जिप्सी पंजीकरण प्रक्रिया 2023 में पारदर्शी तरीके से करने के मामले में दो प्रमुख अखबारों में विज्ञापन निकालकर सभी योग्य आवेदकों को मौका देने के आदेश दिए हैं। निदेशक सीटीआर के शपथपत्र में स्वीकार की गई चूक के आधार पर जिप्सी पंजीकरण में चल रहे एकाधिकार को समाप्त करने का आदेश भी दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया है।
न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इकरा परवीन व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि जिप्सी पंजीकरण 2023-24 में उनको प्रतिभाग का मौका नहीं दिया जा रहा है। उनके पास परमिट और सभी वैध कागज हैं लेकिन उन्हीं को पंजीकरण दिया जा रहा है जो पार्क के जिप्सी व्यवसाय में पूर्व से पंजीकृत हैं। हर साल पंजीकरण के नाम पर उन्हीं का नवीनीकरण हो रहा है।
पूर्व समाज कल्याण अधिकारी कांति राम जोशी को मिली जमानत
हाईकोर्ट ने टिहरी के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी कांति राम जोशी को जमानत दे दी है।न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। टिहरी के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी कांति राम जोशी ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थनापत्र दायर कर कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप गलत हैं। जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि सरकार की ओर से कहा गया कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। जांच में आरोप सही पाए गए हैं।
शासन ने आरोपी से गबन की राशि रिकवरी के निर्देश दिए थे लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी की ओर से दुरुपयोग की गई सात लाख की राशि को जमा करने की अंडरटेकिंग के बाद कोर्ट ने जमानत प्रार्थनापत्र स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर राशि को जमा करने के लिए कहा है। याचिकाकर्ता पर समाज कल्याण विभाग की वर्ष 2010 से 2013 के बीच राशि का गबन का आरोप है। आरोपी फरवरी से जेल में बंद है।
अतिक्रमण मामले में सरकार से किया जवाब तलब
हाईकोर्ट ने शांतिपुरी व जवाहर नगर में सड़कों पर हुए अतिक्रमण को हटाए जाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार को विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 दिसंबर की तिथि नियत की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। खमियां नम्बर 1 शांतिपुरी निवासी पूरन सिंह चौहान ने कहा था कि 1960-61 में हुए बंदोबस्त के नक्शों में शांतिपुरी क्षेत्र में 5 सड़कें दर्शाई गईं हैं।
वर्तमान में इनमें से एक सड़क गायब है और चार अन्य सड़कें जो 22 फुट की थीं वे अब 8 से 10 फुट की रह गईं हैं। इसमें दोनों तरफ से अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया गया है। क्षेत्र के नहरों और तालाबों में भी अतिक्रमण किया गया है। इसमें आमजन को कई तरह की परेशानियां हो रहीं हैं।
चौपहिया मोटर मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के मामले में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने अल्मोड़ा शहर में एनटीडी से पार की तूनी तक चौपहिया मोटर मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के मामले में नगरपालिका अल्मोड़ा व राज्य सरकार को बृहस्पतिवार तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए दो नवंबर की तिथि नियत की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अल्मोड़ा के विधायक मनोज तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय से एनटीडी से धार की तूनी को जोड़ने वाला चौपहिया मोटर मार्ग जगह-जगह पर क्षतिग्रस्त है। पूर्व में पेयजल विभाग की ओर से मटेला पंप से एनटीडी तक पंपिंग पेयजल लाइन बिछाई गई थी, जिस कारण मोटर मार्ग पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है।