उत्तराखंड: उपनल कर्मचारियों की मांग, नियमितीकरण, न्यूनतम वेतनमान और लंबित वेतन का भुगतान
उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ ने गुरुवार को नैनीताल में पत्रकार वार्ता कर उपनल कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को रखा।
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उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ ने गुरुवार को नैनीताल में पत्रकार वार्ता कर उपनल कर्मचारियों के चरणबद्ध नियमितीकरण, न्यूनतम वेतनमान, महंगाई भत्ता, एरियर और पिछले पांच माह के लंबित वेतन के त्वरित भुगतान की मांग की है।
प्रेस वार्ता में संघ की याचिका की हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी पंत उपस्थित रहे। अधिवक्ता एमसी पंत ने इस पूरे मामले के कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान नवीन संविदात्मक व्यवस्था या व्यक्तिगत अनुबंध नहीं, बल्कि उच्च न्यायालय के कुंदन सिंह निर्णय के अनुसार सेवा निरंतरता बनाए रखते हुए नियमितीकरण ही है। पत्रकार वार्ता में पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुर्गा सिंह मेहता ने विभिन्न विभागों में सेवारत 22 हजार उपनल कर्मियों को राज्य कर्मचारी मानकर उनके हित में तत्काल निर्णय लेने का आग्रह सरकार से किया।
संघ के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि उपनल कार्मिकों के मामले का मुख्य आधार उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय का कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य में 12 नवंबर 2018 का निर्णय है, जिसमें कर्मचारियों के चरणबद्ध नियमितीकरण, न्यूनतम वेतन, डीए और एरियर का स्पष्ट निर्देश दिया गया था। राज्य सरकार द्वारा इस फैसले के खिलाफ दायर की गई एसएलपी को 15 अक्टूबर 2024 और पुनर्विचार याचिका को 11 नवंबर 2025 को खारिज किया जा चुका है। इसके अलावा, उच्च न्यायालय में अवमानना याचिकाओं के तहत कार्रवाई जारी है। प्रेस वार्ता में संघ ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता के पत्र का संदर्भ देते हुए बताया कि 10 सितंबर को उच्च न्यायालय ने मौखिक रूप से कर्मचारियों का वेतन न रोकने, पिछले पांच महीनों के लंबित वेतन का तत्काल भुगतान करने तथा कर्मचारियों को नवीन अनुबंध-बॉन्ड के लिए बाध्य न करने का निर्देश दिया था। किन्तु एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी शासन की ओर से कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे वर्षों से अल्प वेतन पर काम कर रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
संघ अध्यक्ष रमेश चन्द्र शर्मा, सलाहकार मनोज जोशी, संरक्षक गणेश गोस्वामी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पूरन चन्द्र भट्ट ने सरकार के समक्ष स्पष्ट मांगें रखी हैं, जिनमें कुंदन सिंह निर्णय के निर्देश ए के अनुसार चरणबद्ध नियमितीकरण शुरू करना, नवीन व्यक्तिगत अनुबंध की अनिवार्यता खत्म कर उपनल ज्वाइनिंग तिथि व सेवा निरंतरता सुरक्षित रखना, और 12 नवंबर 2018 के निर्देशों के तहत न्यूनतम वेतनमान, डीए व एरियर तय करना है। इसके साथ ही, कर्मचारियों की पद-मैपिंग, आवश्यकतानुसार अधिसंख्य पदों का सृजन, लंबित वेतन का तत्काल भुगतान और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को चिकित्सा, अवकाश एवं अन्य आवश्यक सेवा-सुरक्षा लाभ देने की मांग की गई है। संघ ने चेतावनी दी कि अवमानना याचिका की हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 23 सितम्बर तक स्थितियां स्पष्ट नहीं होती हैं, तो वह न्यायालय के समक्ष सभी तथ्य रखकर प्रभावी अनुपालन हेतु न्यायिक कार्रवाई का आग्रह करेगा।