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नैनीताल में प्रमुख क्षेत्रीय दल उक्रांद बैकफुट पर

Sat, 28 Jan 2017 01:47 AM IST
चंद्रेश पांडे
चंद्रेश पांडे Updated Sat, 28 Jan 2017 01:47 AM IST
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Ukrand major regional parties on the backfoot in Nainital
उक्रांद कार्यालय - फोटो : UKD Website

जहां एक ओर देश के ज्यादातर राज्यों में क्षेत्रीय राजनैतिक दल तेजी से उभरकर सरकार बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड को अलग प्रदेश बनाने की मुुहिम शुरू करने से लेकर राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाने उत्तराखंड क्रांति दल नैनीताल विधानसभा सीट पर बैकफुट पर आ पहुंचा है।

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नैनीताल सीट पर उक्रांद ने नामांकन तक नहीं कराया है। जबकि भीमताल विधानसभा सीट पार्टी ने पहले अपने पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष को प्रत्याशी घोषित किया, लेकिन पार्टी की ओर से आखिरी समय में दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष के बजाए किसी अन्य नेता का नामांकन पत्र जमा कराया गया।
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बताते चलें कि उक्रांद हाईकमान द्वारा पिछले दिनों जो प्रत्याशियों की सूची जारी की गई थी, उसमें नैनीताल विधानसभा सीट से वर्तमान पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण और भीमताल सीट से पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. नारायण सिंह जंतवाल को प्रत्याशी घोषित किया गया था।
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लोगों को उम्मीद थी कि पार्टी के उक्त दोनों नेता इस बार विधानसभा चुनाव में अपनी-अपनी सीटों से नामांकन पत्र जमा कर पूरे दमखम के साथ चुनाव लडे़ंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सूत्रों के मुताबिक नैनीताल के पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण ने नैनीताल सीट से चुनाव लड़ने से इसलिए इंकार कर दिया, क्योंकि बतौर पालिकाध्यक्ष उनके कार्यकाल से सरोवर नगरी के उक्रांद कार्यकर्ता ही खुश नहीं थे।

ऐसे में उक्रांद को नैनीताल से चुनाव लड़ने के लिए एक अदद उम्मीदवार तक नहीं मिला। इसके चलते उक्रांद ने नैनीताल से किसी भी प्रत्याशी को चुनाव मैदान में नहीं उतारा। यह स्थिति तब है जबकि उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष नैनीताल में रहकर वकालत करते हैं।

दूसरी ओर उक्रांद हाईकमान द्वारा भीमताल सीट से अपने पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. नारायण सिंह जंतवाल को प्रत्याशी घोषित किया था। डॉ. जंतवाल के नाम की घोषणा होने के बाद भीमताल और इसके आसपास के क्षेत्रों में बतौर प्रत्याशी डॉ. जंतवाल के होर्डिंग्स भी नजर आए थे।

चूंकि भीमताल ब्लॉक के जंतवाल गांव में डॉ. जंतवाल का पैतृक निवास है और आज भी डॉ. जंतवाल की छवि बेहद ईमानदार और कर्मठ नेताओं के रूप में है, लिहाजा लोगों का मानना था कि यदि जंतवाल भीमताल सीट से चुनाव लड़ते हैं तो इस सीट के समीकरणों में उलटफेर कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


सूत्र बताते हैं कि डॉ. जंतवाल ने भी खुद को प्रत्याशी घोषित करने के कुछ समय बाद ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। डॉ. जंतवाल के मैदान छोड़ने के बाद उक्रांद ने भीमताल सीट से नवीन ममगाई को मैदान में उतारा है। अब देखना यह है कि इस बार विधानसभा चुनाव में उक्रांद का ऊंट किस करवट बैठता है।

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