Ramnagar: सीएम को अनफिट जिप्सी पर भ्रमण कराने के मामले में दो कर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी, जानें मामला
जिस अनफिट जिप्सी से पिछले दिनों मुख्यमंत्री धामी को सफारी कराई गई, वही जिप्सी पिछले पांच वर्षों से यहां आने वाले वीवीआईपी मेहमानों को भ्रमण करा रही थी। मुख्यमंत्री 6 जुलाई को इस जिप्सी में दूसरी बार सवार हुए।
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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की जिस अनफिट जिप्सी से पिछले दिनों मुख्यमंत्री धामी को सफारी कराई गई, वही जिप्सी पिछले पांच वर्षों से यहां आने वाले वीवीआईपी मेहमानों को भ्रमण करा रही थी। मुख्यमंत्री 6 जुलाई को इस जिप्सी में दूसरी बार सवार हुए। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर भी इस जिप्सी में घूम चुके हैं। प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) को भी दो बार इस जिप्सी से कॉर्बेट भ्रमण कराया जा चुका है।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की विभागीय जिप्सी यूके 19 जीए-0067 पिछले पांच साल से अनफिट थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस वाहन से छह जुलाई को पार्क के ढेला व झिरना जोन में जंगल सफारी की थी। जिस विभागीय जिप्सी से सीएम को सफारी कराई गई थी, उसकी पांच साल से फिटनेस तक नहीं हुई थी।
इन पांच वर्षों के भीतर तमाम वीवीआईपी कॉर्बेट पार्क पहुंचे तो इसी जिप्सी से उन्होंने जंगल भ्रमण किया। जून 2022 और जून 2024 में प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह को कॉर्बेट पार्क प्रशासन ने इसी जिप्सी से जंगल सफारी कराई। मुख्यमंंत्री पुष्कर सिंह धामी वर्ष 2023 में भी इसी जिप्सी से सफारी कर चुके हैं। भारत रत्न पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को मार्च 2024 में ढिकाला जोन में इसी जिप्सी से सफारी कराई गई।
मेहमानों की सुरक्षा थी दांव पर
पांच साल से अनफिट जिप्सी वीवीआईपी मेहमानों को जंगल सफारी करा रही थी। ऐसे में वीवीआईपी मेहमानों की सुरक्षा ताक पर रही। विभागीय अधिकारियों को अनफिट जिप्सी की फिटनेस कराने का ध्यान ही नहीं था। कॉर्बेट पार्क प्रशासन के पास केवल यही एकमात्र विभागीय जिप्सी है जिससे वीवीआईपी को भ्रमण कराया जाता है।
निजी जिप्सियों पर नजर, अपने वाहन में अनदेखी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व हर पर्यटन सत्र से पहले जिप्सियों का पंजीकरण कराता है। ऐसे में निजी जिप्सी स्वामियों से फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस, प्रदूषण सहित अन्य मानक पूरा करने को कहा जाता है। मानकों पर कमी होने पर उसका पंजीकरण नहीं होता है। कॉर्बेट पार्क की विभागीय जिप्सी की फिटनेस पांच वर्ष से नहीं हुई थी। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगता है। जिप्सी को विभाग ने 2018 में खरीदा था और केवल दो साल ही इसकी फिटनेस कराई।