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Nainital News: फर्जी रजिस्ट्री बैनामा में गवाही के दो आरोपियों को नहीं मिली अग्रिम जमानत
Wed, 08 Apr 2026 12:48 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 08 Apr 2026 12:48 AM IST
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नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी की न्यायालय से मंगलवार को फर्जी रजिस्ट्री बैनामा में गवाही देने के आरोपी प्रकाश भट्ट एवं ललित भट्ट की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। मौजूदा दस्तावेजों में आरोपी कचहरी क्वार्टर तल्लीताल के निवासी हैं।
अभियोजन के अनुसार ग्राम बसगांव पट्टी देवदारू में काबिज भूमि सुरक्षा समिति के सदस्यों की ओर से छह जुलाई 2025 को थाना भवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। आरोप लगाया कि ग्राम सभा बसगांव के खाता संख्या 28 और 54 में जयकिशन जोशी व मुरलीधर जोशी के नाम भूमिधर के रूप में दर्ज है। इसे सह-अभियुक्तों ने साजिश के तहत फर्जी तरीके से बेच दिया है। 16 अगस्त 2024 को सह-अभियुक्तों ने वास्तविक भूमिधरों के स्थान पर फर्जी व्यक्तियों के माध्यम से 13 नाली सात मुट्ठी भूमि का रजिस्ट्री बैनामा मोहन सिंह के नाम पर कर दिया। शेष भूमि के लिए फर्जी तरीके से पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई।
पुलिस विवेचना में फर्जी रजिस्ट्री, इकरारनामा और सर्विलांस के आधार पर मामले का खुलासा हुआ। अभियोजन ने तर्क दिया कि प्रकाश भट्ट और ललित भट्ट ने फर्जी विक्रेताओं की पहचान कर रजिस्ट्री में गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए। पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने धोखाधड़ी के दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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अभियोजन के अनुसार ग्राम बसगांव पट्टी देवदारू में काबिज भूमि सुरक्षा समिति के सदस्यों की ओर से छह जुलाई 2025 को थाना भवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। आरोप लगाया कि ग्राम सभा बसगांव के खाता संख्या 28 और 54 में जयकिशन जोशी व मुरलीधर जोशी के नाम भूमिधर के रूप में दर्ज है। इसे सह-अभियुक्तों ने साजिश के तहत फर्जी तरीके से बेच दिया है। 16 अगस्त 2024 को सह-अभियुक्तों ने वास्तविक भूमिधरों के स्थान पर फर्जी व्यक्तियों के माध्यम से 13 नाली सात मुट्ठी भूमि का रजिस्ट्री बैनामा मोहन सिंह के नाम पर कर दिया। शेष भूमि के लिए फर्जी तरीके से पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई।
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पुलिस विवेचना में फर्जी रजिस्ट्री, इकरारनामा और सर्विलांस के आधार पर मामले का खुलासा हुआ। अभियोजन ने तर्क दिया कि प्रकाश भट्ट और ललित भट्ट ने फर्जी विक्रेताओं की पहचान कर रजिस्ट्री में गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए। पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने धोखाधड़ी के दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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