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ट्रस्ट और एनजीओ की निगरानी
निशांत खनी
Updated Wed, 23 Nov 2016 02:06 AM IST
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वेलफेयर ट्रस्ट और स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) में काला धन खपाने वालों पर आयकर विभाग की डेढ़ी नजर है। ट्रस्ट और एनजीओ की आमदनी इनकम टैक्स से मुक्त है। नोट बंदी के बाद कुमाऊं में ट्रस्ट और एनजीओ के खातों में अचानक जमा धनराशि बढ़ गई है।
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ब्लैक मनी के धन कुबेर अपना काला धन खपाने के लिए ट्रस्ट और एनजीओ के खातों का सहारा ले रहे हैं। आयकर विभाग ने सभी ट्रस्ट और एनजीओ के खातों को स्कैनिंग में लगा दिया है।
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नोट बंदी के बाद से ब्लैक मनी वाले परेशान हैं। 15 से 35 फीसदी कमीशन पर बड़े नोट बदले जा रहे हैं। कई कंपनियां कर्मचारियों को वेतन का एडवांस भुगतान दे रही हैं तो कइयों ने कर्मचारियों के खाते खुलवाकर दो-दो लाख रुपए जमा करवा दिए हैं।
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ब्लैक मनी को व्हाइट करने का ट्रस्ट और एनजीओ में सबसे बड़ा खेल हो रहा है। कुमाऊं में हजारों एनजीओ पंजीकृत हैं। आयकर अधिनियम की धारा 12 ए के तहत एनजीओ टैक्स मुक्त हैं। एनजीओ के पास आयकर विभाग से जारी सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। इसी तरह धार्मिक, एजूकेशनल, वेलफेयर समेत तमाम ट्रस्ट की आय टैक्स फ्री है।
आयकर विभाग के मुताबिक ट्रस्ट और एनजीओ भले ही टैक्स फ्री हैं लेकिन आमदनी का स्रोत दर्शाना जरूरी है। आठ नवंबर के बाद से एनजीओ और ट्रस्ट के बैंक खातों की स्कैनिंग शुरू कर दी है। जिन खातों में अचानक कैश जमा हुआ है उनसे पूछताछ की जाएगी और कैश कहां से आया जवाब देना होगा।
यदि कोई ट्रस्ट और एनजीओ जवाब नहीं दे पाया तो उसकी आयकर छूट खत्म करने के साथ जमा धनराशि पर टैक्स और जुर्माना लगाया जाएगा। यदि कोई ट्रस्ट और एनजीओ गुप्त दान की बात करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। गुप्त दान लेना और देना अपराध है। अगर कोई दान देता है तो ट्रस्ट और एनजीओ को उसका नाम और पता दर्ज करना अनिवार्य है।
आयकर विभाग के मुताबिक जीरो बैलेंस खातों की भी निगरानी हो रही है। बैंक खातों में जमा होने वाली धनराशि का डेटा ऑनलाइन विभाग को मिल रहा है। नियमानुसार ढाई लाख तक की सालाना आमदनी टैक्स फ्री है, लेकिन जीरो बैलेंस खातों में अचानक धनराशि जमा होने पर पूछताछ की जाएगी।
दूसरे व्यक्ति का काला धन अपने खातों में जमा करने की पुष्टि होने पर खाताधारक और काला धन जमा करवाने वाले के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।