{"_id":"e9fc1dab392fef60717b609ecfbfdb7f","slug":"torch-light-treatment-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टार्च की रोशनी में हुआ घायल महिला का इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टार्च की रोशनी में हुआ घायल महिला का इलाज
चंद्रेश पांडे/अमर उजाला,भीमताल
Updated Tue, 03 Feb 2015 08:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर में है और गांव में खोले गए अस्पताल अंतिम सांस गिन रहे हैं। ओखलकांडा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल देख आप भी यही कहेंगे। इस अस्पताल में मरीजों का इलाज टार्च की रोशनी से होता है।
विज्ञापन
यह शर्मनाक स्थिति तब है, जब सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रदेशभर में घूम-घूमकर अस्पतालों को ‘आक्सीजन’ देने की बात करते नहीं थक रहे। मंगलवार शाम पेड़ से गिरकर घायल हुई महिला को अस्पताल लाया गया तो उजाला करने के लिए टार्च जलानी पड़ी।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित इस अस्पताल में दो डाक्टर, फार्मेसिस्ट और दो स्टाफ नर्स हैं। दो करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर अस्पताल का भवन बनवाया गया है, लेकिन संसाधन आज तक नहीं जुटाए गए। जबकि अस्पताल पर 79 ग्रामसभाओं के लोग निर्भर हैं।
विज्ञापन
मल्ला ओखलकांडा ब्लाक के बगौर तोक निवासी मदन सिंह की पत्नी पूनम (20) पेड़ से चारा काटते वक्त मंगलवार की शाम गिरकर घायल हो गई। उसे अस्पताल लाया गया लेकिन तब अस्पताल में अंधेरा था, तीमारदारों ने पूछा तो पता चला कि अस्पताल की विद्युतापूर्ति सुबह से ठप है। ड्यूटी में तैनात दोनों चिकित्सकों में से एक भी मौजूद नहीं था।
चिकित्सकों की अनुपस्थिति में फार्मेसिस्ट अनिल कुमार गंगवार ने टार्च और इमरजेंसी लाइट की रोशनी में घायल पूनम का प्राथमिक इलाज किया। क्षेत्र के समाजसेवी दीपक बर्गली, जीवन कबडिया, हरेंद्र और दीवान सिंह आदि ने बताया कि अस्पताल का जेनरेटर भी तब चालू हुआ जब इलाज लगभग हो चुका था। बमुश्किल दस मिनट चलने के बाद जेनरेटर खुद ही बंद हो गया।
अस्पताल भवन नया बना है और उसमें अभी बिजली कनेक्शन नहीं लगा है। अस्थायी रूप से पुराने भवन से नए भवन में कनेक्शन लिया गया है। मगंलवार सुबह से अस्पताल में लाइट नहीं थी। जेनरेटर पुराने भवन में स्थित है जिसे चालू करने में कुछ समय लग जाता है। मरीज के पहुंचने के कुछ देर बाद जेनरेटर चालू कर दिया गया था। -डा. जगदीप सिंह पटपटिया, प्रभारी चिकित्साधिकारी पीएचसी ओखलकांडा (नैनीताल)।