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57 लाख लेकर तीन लोग फरार, डीजीपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज 22-03-45
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हल्द्वानी। एक युवक ने अपने साथियों के साथ मिलकर निजी बैंक खोला और चार साल में लाखों की रकम जमा कर ली। सितंबर-2021 में रुपये लेकर फरार हो गया। मामले में डीजीपी से शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यूपी के गाजियाबाद (नोएडा) स्थित सर्फाबाद निवासी रोहित कुमार सिंह ने पुलिस से की शिकायत में बताया कि पूर्वी दिल्ली के शकरपुर के रहने वाले अंकुर पाठक ने अविघ्न इंडिया फाइनेंशियल सर्विस नाम से प्राइवेट बैंक दिल्ली में खोली और हल्द्वानी में भी इसका कार्यालय बनाया। अंकुर पाठक वर्तमान में हल्द्वानी में ही रहता था। रोहित कुमार सिंह के मुताबिक इस बैंक में उन्होंने 25 लाख रुपये जमा किए थे। शकरपुर निवासी सीमा कोहली ने 11 लाख और अंकुर सोनी ने 11.15 लाख रुपये 19 जनवरी 2019 से लेकर सितंबर 2021 तक जमा किए थे। बताया कि हल्द्वानी निवासी वरुण कुमार और प्रियांशु सिंह आरोपी के साझेदार थे। आरोप है कि लाखों की रकम जमा होने के बाद तीनों आरोपी फरार हो गए। पीड़ित ने तीनों लोगों के रुपये वापस दिलाने के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं डीजीपी के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने अंकुर पाठक, प्रियांशु सिंह और वरूण कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। एसएसपी पंकज भट्ट ने बताया कि मामले की जांच फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट को सौंप दी गई है।
ज्यादा ब्याज दर का दिया था झांसा
रोहित ने बताया कि आरोपियों ने ज्यादातर उन लोगों को अपने साथ जोड़ा था जो उनकी पहचान के थे। ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए पहले तो कंपनी ने साल 2017 से 1000 रुपये प्रतिमाह जमा करने पर एक साल बाद 18 हजार रुपये देने का लालच दिया और रकम जमा करना शुरू कर दी। बताया कि आरोपियों ने कंपनी का एक कार्यालय घर में और बाकी अन्य जगहों पर भी बना रखे थे।
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पहले टैक्सी कंपनी खोली, नुकसान बताकर कर दी बंद
जानकारी के मुताबिक आरोपी वरुण कुमार ने दिल्ली में साल 2015 में टैक्सी व्यापार भी शुरू किया था। जिसमें चार गाड़ियां वरुण कुमार की थीं और 10 गाड़ियां अंकुर पाठक की भी संचालित हो रही थीं। कुछ समय बाद अरुण कुमार ने व्यापार में नुकसान होने के बाद अंकुर की गाड़ियां बिकवा दीं और उनकी धनराशि से बैंक का कर्ज चुकता कर दिया। साथ ही अपनी चार कारें बेचकर उनकी धनराशि को अपने खाते में जमा करा लिया और उस रकम से नया व्यापार शुरू करने की बात कही।
अंकुर की मां बोली, मेरा बेटा दोषी नहीं, वरुण है जिम्मेदार
लाखों की धोखाधड़ी के मामले में नामजद आरोपी अंकुर पाठक की मां ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के पुलिस महानिरीक्षक को पत्र लिखकर अंकुर को बेकसूर बताया था। तहरीर के मुताबिक उन्होंने बताया कि वरुण पहले भी अलग-अलग तरह की कंपनियां खोलकर उनके बेटे को करोड़पति बनाने का झांसा देता था और कभी कंपनी में निवेशकों को लाने तो कभी आम लोगों से रुपये निवेश कराने का काम अंकुर से कराता था।
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यूपी के गाजियाबाद (नोएडा) स्थित सर्फाबाद निवासी रोहित कुमार सिंह ने पुलिस से की शिकायत में बताया कि पूर्वी दिल्ली के शकरपुर के रहने वाले अंकुर पाठक ने अविघ्न इंडिया फाइनेंशियल सर्विस नाम से प्राइवेट बैंक दिल्ली में खोली और हल्द्वानी में भी इसका कार्यालय बनाया। अंकुर पाठक वर्तमान में हल्द्वानी में ही रहता था। रोहित कुमार सिंह के मुताबिक इस बैंक में उन्होंने 25 लाख रुपये जमा किए थे। शकरपुर निवासी सीमा कोहली ने 11 लाख और अंकुर सोनी ने 11.15 लाख रुपये 19 जनवरी 2019 से लेकर सितंबर 2021 तक जमा किए थे। बताया कि हल्द्वानी निवासी वरुण कुमार और प्रियांशु सिंह आरोपी के साझेदार थे। आरोप है कि लाखों की रकम जमा होने के बाद तीनों आरोपी फरार हो गए। पीड़ित ने तीनों लोगों के रुपये वापस दिलाने के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं डीजीपी के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने अंकुर पाठक, प्रियांशु सिंह और वरूण कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। एसएसपी पंकज भट्ट ने बताया कि मामले की जांच फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट को सौंप दी गई है।
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ज्यादा ब्याज दर का दिया था झांसा
रोहित ने बताया कि आरोपियों ने ज्यादातर उन लोगों को अपने साथ जोड़ा था जो उनकी पहचान के थे। ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए पहले तो कंपनी ने साल 2017 से 1000 रुपये प्रतिमाह जमा करने पर एक साल बाद 18 हजार रुपये देने का लालच दिया और रकम जमा करना शुरू कर दी। बताया कि आरोपियों ने कंपनी का एक कार्यालय घर में और बाकी अन्य जगहों पर भी बना रखे थे।
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पहले टैक्सी कंपनी खोली, नुकसान बताकर कर दी बंद
जानकारी के मुताबिक आरोपी वरुण कुमार ने दिल्ली में साल 2015 में टैक्सी व्यापार भी शुरू किया था। जिसमें चार गाड़ियां वरुण कुमार की थीं और 10 गाड़ियां अंकुर पाठक की भी संचालित हो रही थीं। कुछ समय बाद अरुण कुमार ने व्यापार में नुकसान होने के बाद अंकुर की गाड़ियां बिकवा दीं और उनकी धनराशि से बैंक का कर्ज चुकता कर दिया। साथ ही अपनी चार कारें बेचकर उनकी धनराशि को अपने खाते में जमा करा लिया और उस रकम से नया व्यापार शुरू करने की बात कही।
अंकुर की मां बोली, मेरा बेटा दोषी नहीं, वरुण है जिम्मेदार
लाखों की धोखाधड़ी के मामले में नामजद आरोपी अंकुर पाठक की मां ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के पुलिस महानिरीक्षक को पत्र लिखकर अंकुर को बेकसूर बताया था। तहरीर के मुताबिक उन्होंने बताया कि वरुण पहले भी अलग-अलग तरह की कंपनियां खोलकर उनके बेटे को करोड़पति बनाने का झांसा देता था और कभी कंपनी में निवेशकों को लाने तो कभी आम लोगों से रुपये निवेश कराने का काम अंकुर से कराता था।