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Ranikhet: इस सीट पर कांग्रेस में टिकट के लिए घमासान, महिला जिलाध्यक्ष और पूर्व जिला पंचायत सदस्य आमने-सामने
Sat, 05 Jul 2025 12:48 PM IST
हीरा मेहरा
चेतन जोशी, संवाद
चेतन जोशी, संवाद
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 05 Jul 2025 12:48 PM IST
सार
मोवड़ी जिला पंचायत सीट कांग्रेस के लिए चुनौती बनती जा रही है। महिला जिलाध्यक्ष और कार्यकारी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष की पत्नी और निवर्तमान सदस्य शोभा रौतेला ने ताल ठोक दी है। दोनों ही अपने-अपने स्तर पर मजबूत दावेदारी के साथ मैदान में डटी हुई हैं।
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पंचायत चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंचायत चुनाव में मोवड़ी जिला पंचायत सीट कांग्रेस के लिए चुनौती बनती जा रही है। महिला जिलाध्यक्ष गीता पवार और कार्यकारी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत रौतेला की पत्नी और निवर्तमान सदस्य शोभा रौतेला ने ताल ठोक दी है। दोनों ही अपने-अपने स्तर पर मजबूत दावेदारी के साथ मैदान में डटी हुई हैं।
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सूत्रों की मानें तो पार्टी की ओर से जारी सूची में दोनों नामों की चर्चा से ही भीतरखाने हलचल तेज हुई, लेकिन जैसे ही टिकट को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई, कार्यकर्ताओं में मतभेद उभर आया। गीता पवार लंबे समय से इस सीट पर सक्रिय हैं और महिला जिलाध्यक्ष के तौर पर पार्टी में मजबूत पकड़ रखती हैं। वे पार्टी की रीति-नीति से भी गहराई से जुड़ी रही हैं, लिहाजा टिकट को लेकर उनका दावा भी काफी सशक्त माना जा रहा था। दूसरी ओर, शोभा रौतेला इस समय मोवड़ी सीट से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य हैं। उनका कहना है कि पिछले कार्यकाल में उन्होंने क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किए हैं और जनता के बीच सीधा संपर्क उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
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उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ने की मंशा पहले ही स्पष्ट कर दी थी। दोनों ही दावेदारों के चुनावी मैदान में उतरने से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पक्षों को कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका और अब दोनों प्रत्याशी कांग्रेस का झंडा थामे चुनावी समर में आमने-सामने हैं। गौरतलब है कि मोवड़ी सीट को कांग्रेस का परंपरागत गढ़ माना जाता है और इस बार यहां जीत दर्ज करना पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है।
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काफी समझाने के बावजूद दोनों दावेदार अपने निर्णय पर अडिग रहे, तो पार्टी ने मोवड़ी सीट से किसी को भी औपचारिक समर्थन नहीं देने का फैसला किया है। यहां गुटबाजी का कोई सवाल नहीं है, यह लोकतंत्र है और कोई भी योग्य उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है। - दीपक किरौला, जिलाध्यक्ष रानीखेत