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नगर निगम की दुकानों में भी स्टांप और निबंधन शुल्क की चोरी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jan 2021 01:08 AM IST
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Theft of stamps and registration fees even in municipal shops
प्रतीकात्मक।
हल्द्वानी। नगर निगम ने अपनी दुकानों को किराए पर देने के लिए किराएदारों के साथ करारनामा तो किया लेकिन करारनामा रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत नहीं कराया। इस कारण राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के स्टांप और निबंधन शुल्क का फटका लगा।
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नगर निगम के पास 1183 दुकानें हैं। इनसे प्रतिवर्ष करीब 80 लाख रुपये किराया आता है। स्टांप एक्ट के अनुसार किराएदार के साथ करारनामा तभी मान्य होगा, जब उसमें स्टांप और निबंधन शुल्क दिया होगा और वह रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत होगा लेकिन निगम ने एक भी किराएदार का करारनामा रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत नहीं कराया है। स्टांप एक्ट कहता है कि एक वर्ष से कम, एक वर्ष या एक वर्ष से अधिक कोई करारनामा किया जाता है, चाहे वह किराएदारी से संबंधित हो या अन्य संपत्ति से, तो उसे रजिस्ट्रार के वहां अनिवार्य रूप से पंजीकृत करवाना होगा। इस पर स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क भी अनिवार्य रूप से देना होगा। 100 रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्ति को प्रभावित करने वाला विलेख रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 की धारा 17 के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकृत किया जाएगा। अगर सक्षम अधिकारी के सामने ऐसा कोई भी मामला आता है तो उसका दायित्व है कि वह जिलाधिकारी के वहां वाद दायर कराए।
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पगड़ी पर भी लगता है स्टांप और निबंधन शुल्क
दुकान किराए पर देने पर अगर पगड़ी दी गई हो तो उस पगड़ी पर भी स्टांप और निबंधन शुल्क लगता है।
मेरे कार्यकाल में एक भी दुकान किराए पर नहीं दी गई। पूर्व में किस आधार पर दुकान किराए पर दी गई है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
-चंद्र सिंह मर्तोलिया, नगर आयुक्त
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