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Nainital News: गिद्धों ने तीन हजार किलोमीटर आसमान नापा
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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कार्यालय में होती अधिकारियों की बैठक।
रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की जैवविविधता हॉग डियर, शिकारी पक्षियों के लिए मुफीद है। पार्क में इनका बेहतर संरक्षण हो रहा है। यह बात पार्क में चल रहे शोध कार्यों पर कॉर्बेट फांउडेशन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ हुई बैठक में सीटीआर निदेशक ने कही।
शुक्रवार को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कार्यालय में हुई बैठक में सीटीआर निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि नवंबर 2023 से अप्रैल 2025 तक पांच गिद्धों को सैटेलाइट टैग लगाकर छोड़ा गया था। यह कॉर्बेट पार्क से होकर राजाजी नेशनल पार्क तक का सफर कर वापस अल्मोड़ा वन क्षेत्र में पहुंचे। 90 दिन के भीतर गिद्धों ने लगभग 3000 किलोमीटर का सफर तय किया। कॉर्बेट में गिद्धों की नौ प्रजातियां देखने को मिली हैं, जो अच्छा संकेत है। पर्यावरण के संतुलन में गिद्ध अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।
इस दौरान हॉग डियरों की संख्या, उनके भोजन, उनके अधिक मूवमेंट वाले स्थानों पर चर्चा हुई। हाल ही में हुई गणना में पार्क में 189 हॉग डियर की मौजूदगी दर्ज हुई है। हॉग डियर की संख्या में इजाफा सबसे अच्छा संकेत है। सर्वे रिपोर्ट में कॉर्बेट के जंगल में शिकारी पक्षियों के ठिकाने सुरक्षित मिले हैं, इससे कॉर्बेट का जंगल वन्यजीवों के बाद शिकारी पक्षियों के अनुकूल है। इस मौके पर भूमि अतिरिक्त संरक्षण की डीएफओ शिल्पी जोशी, पार्क वार्डन अमित ग्वासीकोटी, कॉर्बेट फांउडेशन के निदेशक डॉ. हेमंत बर्गली, डब्लडब्लूएफ के मिराज अनवर, प्रेमा तिवारी आदि रहीं। संवाद
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शुक्रवार को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कार्यालय में हुई बैठक में सीटीआर निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि नवंबर 2023 से अप्रैल 2025 तक पांच गिद्धों को सैटेलाइट टैग लगाकर छोड़ा गया था। यह कॉर्बेट पार्क से होकर राजाजी नेशनल पार्क तक का सफर कर वापस अल्मोड़ा वन क्षेत्र में पहुंचे। 90 दिन के भीतर गिद्धों ने लगभग 3000 किलोमीटर का सफर तय किया। कॉर्बेट में गिद्धों की नौ प्रजातियां देखने को मिली हैं, जो अच्छा संकेत है। पर्यावरण के संतुलन में गिद्ध अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।
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इस दौरान हॉग डियरों की संख्या, उनके भोजन, उनके अधिक मूवमेंट वाले स्थानों पर चर्चा हुई। हाल ही में हुई गणना में पार्क में 189 हॉग डियर की मौजूदगी दर्ज हुई है। हॉग डियर की संख्या में इजाफा सबसे अच्छा संकेत है। सर्वे रिपोर्ट में कॉर्बेट के जंगल में शिकारी पक्षियों के ठिकाने सुरक्षित मिले हैं, इससे कॉर्बेट का जंगल वन्यजीवों के बाद शिकारी पक्षियों के अनुकूल है। इस मौके पर भूमि अतिरिक्त संरक्षण की डीएफओ शिल्पी जोशी, पार्क वार्डन अमित ग्वासीकोटी, कॉर्बेट फांउडेशन के निदेशक डॉ. हेमंत बर्गली, डब्लडब्लूएफ के मिराज अनवर, प्रेमा तिवारी आदि रहीं। संवाद
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