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Nainital News: बलियानाले की कच्ची चट्टानें वाहनों का भार और कंपन सहन करने के लिए सक्षम नहीं
Sun, 18 Oct 2026 02:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:05 AM IST
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नैनीताल। कृष्णापुर के लिए मोटर मार्ग की मांग कर रहे लोगों की आशाओं पर फिलहाल पानी फिर गया है। शनिवार को भू-वैज्ञानिकों की ओर से किए गए निरीक्षण में यहां मार्ग की संभावनाओं को चुनौतीपूर्ण बताया गया। कहा कि बलियानाले की कच्ची चट्टानें वाहनों का भार व कंपन सहन करने के लिए कतई सक्षम नहीं हैं। यदि कच्ची चट्टानों पर दोबारा दरारें आएंगी तो चुनौतियां और कठिन हो जाएंगी और खतरा बढ़ जाएगा। यही नहीं मेंटेनेंस के लिए अनुबंधित ठेकेदार से कार्य लेना भी कठिन हो जाएगा।
बता दें कि कृष्णापुर के लिए मार्ग निर्माण की मांग कर रहे लोग बीते 20 दिनों से आंदोलनरत हैं। उनकी आस भू-वैज्ञानिकों के दौरे पर टिकी हुई थी। शनिवार को एनएचपीसी यूटेक के चीफ व वर्तमान में बलियानाला में भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञ की जिम्मेदारी संभाल रहे भाष्कर पाटनी और जियोटेक्निकल इंजीनियर भावेश पांडे ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बलियानाले का निरीक्षण किया।
इस दौरान कृष्णापुर के लोगों ने भी अपना पक्ष रखा। इसमें आपातकालीन स्थिति में दिक्कत समेत विद्यार्थियों, गर्भवतियों समेत बुजुर्गों की समस्या को रखा। क्षेत्रवासियों को सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सिपाहीधारा के पार से वैकल्पिक मार्ग पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों के पुन: सर्वे, तकनीकी, वित्तीय स्वीकृति के बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जा सकेगी। इस मौके पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह, सहायक अभियंता प्रमोद पाठक, क्षेत्रवासी डीएन भट्ट, दीपेश भट्ट, रेखा जोशी, एडी सनवाल, सुरेंद्र आदि रहे।
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मिट्टी में परिवर्तित हो चुके हैं पहाड़
निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने माना कि कृष्णापुर क्षेत्र के लोगों के लिए सड़क की सुविधा न होना बड़ी समस्या है और मोटर मार्ग की उनकी मांग जायज है। बलियानाला क्षेत्र में कार्य से पूर्व हुए सर्वे में आईआईटी रुड़की समेत विषय विशेषज्ञों ने माना कि बलियानाले की चट्टानें (रॉक) फ्रेक्चर हैं। ये मिट्टी में परिवर्तित हो चुके हैं। इस चुनौती के बाद इसकी डीपीआर में केबल एंकरिंग, रॉक एंकरिंग, पाइलिंग, एसडीए समेत अन्य ट्रीटमेंट को जोड़ा गया।
तल्लीताल डांठ पर धरना प्रदर्शन जारी
कृष्णापुर के लिए मोटर मार्ग की मांग कर रहे निवासियों का धरना प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। पूर्व सभासद कैलाश रौतेला का कहना है कि भू-वैज्ञानिकों के सर्वे के बाद क्षेत्रवासियों से मिली जानकारी में मार्ग की संभावनाएं नजर नहीं आतीं। शीघ्र ही आपसी रायशुमारी के बाद आंदोलन को तेज किया जाएगा। मशाल जुलूस, बलियानाला कार्यक्षेत्र में आंंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है।
भूकटाव रोकने के लिए पानी का चैनलाइज करना जरूरी
नैनीताल। बलियानाला में सुरक्षा कार्यों के बावजूद भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है। इस बरसात में टूटा पहाड़, कैलाखान और दुर्गापुर नर्सरी क्षेत्रों में हुए भूस्खलन ने सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। भू-कटाव रोकने के लिए पानी को वीरभट्टी पुल तक चैनलाइज करना जरूरी है।
शहर का बलियानाला क्षेत्र शुरुआत से ही संवेदनशील रहा है। करीब 1980 के दशक में आवासीय बसावट के बाद यह और संवेदनशील हो गया था। इसी कारण प्रतिष्ठित रईस होटल क्षेत्र भूस्खलन की भेंट चढ़ गया था। बीते दशक में आए भूस्खलन से जीआईसी, हरिनगर, सिपाही धारा और कृष्णापुर को खतरा बढ़ा था।
करीब तीन सौ करोड़ रुपये के कार्य से कुछ क्षेत्र सुरक्षित हुए हैं। हालांकि, इस बरसात में टूटा पहाड़, कैलाखान और दुर्गापुर नर्सरी के भूस्खलन ने फिर डराया है। इसी कारण बीते दिनों यूएलएमसी की टीम ने क्षेत्र का दौरा किया था। अब वीरभट्टी पुल तक पानी के बहाव को चैनलाइज करने की बात उठने लगी है। क्षेत्रवासी भी इन संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
1974 में भी हाईपावर कमेटी ने दिया था सुझाव
पूर्व पालिका उपाध्यक्ष डीएन भट्ट ने बताया कि वर्ष 1974 में हाईपावर समिति ने तल्लीताल डांठ से हरिनगर तक बने 22 फॉल के आगे वीरभट्टी तक 2.2 किलोमीटर फॉल बनाकर पानी को चैनलाइज करने का सुझाव दिया था। पूर्व सभासद कैलाश रौतेला ने कहा कि पानी को चैनलाइज कर ही भूकटाव रोका जा सकता है। उन्होंने बलियानाला के सुरक्षा कार्य में पानी के फॉल की सुव्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
बलियानाला सुरक्षा कार्य तक पानी के बहाव को देखते हुए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इससे आगे वीरभट्टी तक अभी करीब एक किलोमीटर का क्षेत्र शेष है। वहां तक फॉल और सुरक्षा कार्य विषय विशेषज्ञों की राय के बाद ही किए जा सकेंगे। इसके लिए उच्चाधिकारियों के आदेश का इंतजार है। - प्रमोद पाठक, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग
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बता दें कि कृष्णापुर के लिए मार्ग निर्माण की मांग कर रहे लोग बीते 20 दिनों से आंदोलनरत हैं। उनकी आस भू-वैज्ञानिकों के दौरे पर टिकी हुई थी। शनिवार को एनएचपीसी यूटेक के चीफ व वर्तमान में बलियानाला में भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञ की जिम्मेदारी संभाल रहे भाष्कर पाटनी और जियोटेक्निकल इंजीनियर भावेश पांडे ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बलियानाले का निरीक्षण किया।
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इस दौरान कृष्णापुर के लोगों ने भी अपना पक्ष रखा। इसमें आपातकालीन स्थिति में दिक्कत समेत विद्यार्थियों, गर्भवतियों समेत बुजुर्गों की समस्या को रखा। क्षेत्रवासियों को सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सिपाहीधारा के पार से वैकल्पिक मार्ग पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों के पुन: सर्वे, तकनीकी, वित्तीय स्वीकृति के बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जा सकेगी। इस मौके पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह, सहायक अभियंता प्रमोद पाठक, क्षेत्रवासी डीएन भट्ट, दीपेश भट्ट, रेखा जोशी, एडी सनवाल, सुरेंद्र आदि रहे।
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मिट्टी में परिवर्तित हो चुके हैं पहाड़
निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने माना कि कृष्णापुर क्षेत्र के लोगों के लिए सड़क की सुविधा न होना बड़ी समस्या है और मोटर मार्ग की उनकी मांग जायज है। बलियानाला क्षेत्र में कार्य से पूर्व हुए सर्वे में आईआईटी रुड़की समेत विषय विशेषज्ञों ने माना कि बलियानाले की चट्टानें (रॉक) फ्रेक्चर हैं। ये मिट्टी में परिवर्तित हो चुके हैं। इस चुनौती के बाद इसकी डीपीआर में केबल एंकरिंग, रॉक एंकरिंग, पाइलिंग, एसडीए समेत अन्य ट्रीटमेंट को जोड़ा गया।
तल्लीताल डांठ पर धरना प्रदर्शन जारी
कृष्णापुर के लिए मोटर मार्ग की मांग कर रहे निवासियों का धरना प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। पूर्व सभासद कैलाश रौतेला का कहना है कि भू-वैज्ञानिकों के सर्वे के बाद क्षेत्रवासियों से मिली जानकारी में मार्ग की संभावनाएं नजर नहीं आतीं। शीघ्र ही आपसी रायशुमारी के बाद आंदोलन को तेज किया जाएगा। मशाल जुलूस, बलियानाला कार्यक्षेत्र में आंंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है।
भूकटाव रोकने के लिए पानी का चैनलाइज करना जरूरी
नैनीताल। बलियानाला में सुरक्षा कार्यों के बावजूद भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है। इस बरसात में टूटा पहाड़, कैलाखान और दुर्गापुर नर्सरी क्षेत्रों में हुए भूस्खलन ने सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। भू-कटाव रोकने के लिए पानी को वीरभट्टी पुल तक चैनलाइज करना जरूरी है।
शहर का बलियानाला क्षेत्र शुरुआत से ही संवेदनशील रहा है। करीब 1980 के दशक में आवासीय बसावट के बाद यह और संवेदनशील हो गया था। इसी कारण प्रतिष्ठित रईस होटल क्षेत्र भूस्खलन की भेंट चढ़ गया था। बीते दशक में आए भूस्खलन से जीआईसी, हरिनगर, सिपाही धारा और कृष्णापुर को खतरा बढ़ा था।
करीब तीन सौ करोड़ रुपये के कार्य से कुछ क्षेत्र सुरक्षित हुए हैं। हालांकि, इस बरसात में टूटा पहाड़, कैलाखान और दुर्गापुर नर्सरी के भूस्खलन ने फिर डराया है। इसी कारण बीते दिनों यूएलएमसी की टीम ने क्षेत्र का दौरा किया था। अब वीरभट्टी पुल तक पानी के बहाव को चैनलाइज करने की बात उठने लगी है। क्षेत्रवासी भी इन संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
1974 में भी हाईपावर कमेटी ने दिया था सुझाव
पूर्व पालिका उपाध्यक्ष डीएन भट्ट ने बताया कि वर्ष 1974 में हाईपावर समिति ने तल्लीताल डांठ से हरिनगर तक बने 22 फॉल के आगे वीरभट्टी तक 2.2 किलोमीटर फॉल बनाकर पानी को चैनलाइज करने का सुझाव दिया था। पूर्व सभासद कैलाश रौतेला ने कहा कि पानी को चैनलाइज कर ही भूकटाव रोका जा सकता है। उन्होंने बलियानाला के सुरक्षा कार्य में पानी के फॉल की सुव्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
बलियानाला सुरक्षा कार्य तक पानी के बहाव को देखते हुए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इससे आगे वीरभट्टी तक अभी करीब एक किलोमीटर का क्षेत्र शेष है। वहां तक फॉल और सुरक्षा कार्य विषय विशेषज्ञों की राय के बाद ही किए जा सकेंगे। इसके लिए उच्चाधिकारियों के आदेश का इंतजार है। - प्रमोद पाठक, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग