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Nainital News: मेडिकल कॉलेजों में एनआईसी सॉफ्टवेयर से डिजिटल होगा अस्पताल प्रबंधन
Sun, 18 Oct 2026 02:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:07 AM IST
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हल्द्वानी। प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अस्पताल व्यवस्थाओं को डिजिटल किया जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र का अस्पताल प्रबंधन सॉफ्टवेयर लागू कर रहा है। इससे मरीज के पंजीकरण से लेकर उपचार और अन्य अस्पताल सेवाओं का रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल सिस्टम में दर्ज होगा।
यह व्यवस्था अस्पतालों की ऑनलाइन निगरानी में सहायक होगी। किस अस्पताल में कितने मरीज ओपीडी में पहुंचे, कितने मरीज भर्ती हैं, कितने बेड खाली हैं और कितनी जांचें हुईं, जैसी जानकारी डिजिटल माध्यम से मिलेगी।
एसटीएच के एचआईएस प्रमुख सीएस गुरुरानी ने बताया कि सॉफ्टवेयर से कर्मचारियों का काम हल्का हो जाएगा। एक डेमोंस्ट्रेशन हो चुका है और कुछ कमियां एनआईसी को बताई गई थीं। 19 अगस्त को एक और डेमोंस्ट्रेशन होगा, जिसके बाद इसे लागू किया जाएगा।
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हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अजय आर्या ने कहा कि डॉक्टरों को मरीज का पुराना रिकॉर्ड और जांच संबंधी जानकारी मिलेगी। अस्पताल प्रशासन के लिए बेड, मरीजों की संख्या, जांच और फार्मेसी डेटा का प्रबंधन आसान होगा। एनआईसी के सर्वर में डेटा होने से निदेशक और एनएमसी ओपीडी तथा भर्ती प्रक्रिया पर नजर रख सकेंगे।
मरीजों का बचेगा समय और मिलेगा उपचार
सॉफ्टवेयर लागू होने पर मरीजों का रिकॉर्ड बार-बार अलग-अलग रजिस्टरों में दर्ज करने की जरूरत कम होगी। ओपीडी, आईपीडी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी की जानकारी एक ही डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ेगी। मरीज घर से ऑनलाइन अपना नंबर लगा सकेंगे। आभा आईडी से लिंक होकर उन्हें टोकन नंबर मिलेगा और ओपीडी की लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
किसी मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ने, किसी सेवा पर अधिक दबाव होने या किसी संसाधन की कमी जैसी स्थिति की पहचान पहले की तुलना में तेजी से हो सकेगी। हमने सभी मेडिकल कॉलेजों को नए सिस्टम को लागू करने के लिए पत्र पहले ही भेज दिया था। - डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा
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यह व्यवस्था अस्पतालों की ऑनलाइन निगरानी में सहायक होगी। किस अस्पताल में कितने मरीज ओपीडी में पहुंचे, कितने मरीज भर्ती हैं, कितने बेड खाली हैं और कितनी जांचें हुईं, जैसी जानकारी डिजिटल माध्यम से मिलेगी।
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एसटीएच के एचआईएस प्रमुख सीएस गुरुरानी ने बताया कि सॉफ्टवेयर से कर्मचारियों का काम हल्का हो जाएगा। एक डेमोंस्ट्रेशन हो चुका है और कुछ कमियां एनआईसी को बताई गई थीं। 19 अगस्त को एक और डेमोंस्ट्रेशन होगा, जिसके बाद इसे लागू किया जाएगा।
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हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अजय आर्या ने कहा कि डॉक्टरों को मरीज का पुराना रिकॉर्ड और जांच संबंधी जानकारी मिलेगी। अस्पताल प्रशासन के लिए बेड, मरीजों की संख्या, जांच और फार्मेसी डेटा का प्रबंधन आसान होगा। एनआईसी के सर्वर में डेटा होने से निदेशक और एनएमसी ओपीडी तथा भर्ती प्रक्रिया पर नजर रख सकेंगे।
मरीजों का बचेगा समय और मिलेगा उपचार
सॉफ्टवेयर लागू होने पर मरीजों का रिकॉर्ड बार-बार अलग-अलग रजिस्टरों में दर्ज करने की जरूरत कम होगी। ओपीडी, आईपीडी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी की जानकारी एक ही डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ेगी। मरीज घर से ऑनलाइन अपना नंबर लगा सकेंगे। आभा आईडी से लिंक होकर उन्हें टोकन नंबर मिलेगा और ओपीडी की लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
किसी मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ने, किसी सेवा पर अधिक दबाव होने या किसी संसाधन की कमी जैसी स्थिति की पहचान पहले की तुलना में तेजी से हो सकेगी। हमने सभी मेडिकल कॉलेजों को नए सिस्टम को लागू करने के लिए पत्र पहले ही भेज दिया था। - डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा