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एसटीएच में तड़पकर मर गया मरीज, देखने कोई नहीं पहुंचा
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प्रतीकात्मक फोटो।
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल पर एक बार फिर आरोप लगे हैं। बिंदुखत्ता क्षेत्र के एक युवक की एसटीएच में उपचार के दौरान मौत हो गई तो उसके परिजनों ने लापरवाही की वजह से मौत का आरोप लगाया है। मौसेरे भाई ने आरोप लगाया है कि गलत दवाई दिए जाने और समय पर उपचार न मिलने से मौत हुई है।
आठ नवंबर को तीनपानी में अभिषेक भट्ट नाम का युवक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। वह कैटरिंग में काम करता था। उसे तुरंत ही एसटीएच में भर्ती कराया गया। फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी उसके मौसी का बेटा कमल भट्ट उसकी तीमारदारी था। उसने बताया कि उसके भाई की स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा था। और डॉक्टरों ने बताया था कि उसका भाई जल्द ठीक हो जाएगा। अभिषेक को आईसीयू से निकालकर एच वार्ड के बेड नंबर 88 पर शिफ्ट कर दिया गया था। रविवार सुबह करीब 5:00 बजे उसकी अचानक तबीयत बिगड़ी। कमल के अनुसार वह उस समय वहीं मौजूद था। अभिषेक जोर-जोर से सांस लेने लगा।
कमल ने बताया कि वह तुरंत ही वह नर्स के पास पहुंचा और उसके भाई को देखने को कहा। आरोप है कि नर्स टस से मस नहीं हुई और न ही डॉक्टर को सूचित किया। कमल के अनुसार बार-बार कहने के बाद भी नर्स ने कोई एक्शन नहीं लिया। बहुत देर बाद नर्स ने उसके भाई को कोई दवाई दी जिसके बाद से उसकी तबियत और बिगड़ती गई। कमल का आरोप है कि सुबह पांच बजे उसके भाई की तबीयत खराब हुई थी और उसको सुबह 7:30 बजे डॉक्टर देखने आए और उसके बाद डॉक्टर ने तुरंत उसे फिर से आईसीयू में एडमिट कर दिया और बताया कि अब उसके भाई की स्थिति काफी गंभीर है। इधर दिनभर उपचार के बाद देर शाम अभिषेक की मौत हो गई। कमल ने बताया कि उसके भाई से उसको मिलने भी नहीं दिया गया और आईसीयू के गेट पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया। उसने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि सही उपचार न मिलने की वजह से उसके भाई की मौत हुई है। उसका यह भी कहना है कि उसने एमएस को भी फोन लगाया था लेकिन बात नहीं हुई।
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कोट
हादसे में मरीज का दिमाग फट गया था। एसटीएच के डॉक्टरों ने दिमाग को अंदर डाला था जिससे उसको होश आया और उसकी सेहत में सुधार था। इस तरह के मामलों में स्थिति गंभीर ही होती है। सम्भवत: उसे सुबह दौरा आया होगा। यह किसी दवा का रिएक्शन नहीं है। इसके बाद आईसीयू में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी। अगर उसके परिजन पोटमार्टम करवाना चाहते हैं तो करवा सकते हैं।
- डॉ अरुण जोशी, एमएस, एसटीएच
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आठ नवंबर को तीनपानी में अभिषेक भट्ट नाम का युवक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। वह कैटरिंग में काम करता था। उसे तुरंत ही एसटीएच में भर्ती कराया गया। फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी उसके मौसी का बेटा कमल भट्ट उसकी तीमारदारी था। उसने बताया कि उसके भाई की स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा था। और डॉक्टरों ने बताया था कि उसका भाई जल्द ठीक हो जाएगा। अभिषेक को आईसीयू से निकालकर एच वार्ड के बेड नंबर 88 पर शिफ्ट कर दिया गया था। रविवार सुबह करीब 5:00 बजे उसकी अचानक तबीयत बिगड़ी। कमल के अनुसार वह उस समय वहीं मौजूद था। अभिषेक जोर-जोर से सांस लेने लगा।
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कमल ने बताया कि वह तुरंत ही वह नर्स के पास पहुंचा और उसके भाई को देखने को कहा। आरोप है कि नर्स टस से मस नहीं हुई और न ही डॉक्टर को सूचित किया। कमल के अनुसार बार-बार कहने के बाद भी नर्स ने कोई एक्शन नहीं लिया। बहुत देर बाद नर्स ने उसके भाई को कोई दवाई दी जिसके बाद से उसकी तबियत और बिगड़ती गई। कमल का आरोप है कि सुबह पांच बजे उसके भाई की तबीयत खराब हुई थी और उसको सुबह 7:30 बजे डॉक्टर देखने आए और उसके बाद डॉक्टर ने तुरंत उसे फिर से आईसीयू में एडमिट कर दिया और बताया कि अब उसके भाई की स्थिति काफी गंभीर है। इधर दिनभर उपचार के बाद देर शाम अभिषेक की मौत हो गई। कमल ने बताया कि उसके भाई से उसको मिलने भी नहीं दिया गया और आईसीयू के गेट पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया। उसने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि सही उपचार न मिलने की वजह से उसके भाई की मौत हुई है। उसका यह भी कहना है कि उसने एमएस को भी फोन लगाया था लेकिन बात नहीं हुई।
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हादसे में मरीज का दिमाग फट गया था। एसटीएच के डॉक्टरों ने दिमाग को अंदर डाला था जिससे उसको होश आया और उसकी सेहत में सुधार था। इस तरह के मामलों में स्थिति गंभीर ही होती है। सम्भवत: उसे सुबह दौरा आया होगा। यह किसी दवा का रिएक्शन नहीं है। इसके बाद आईसीयू में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी। अगर उसके परिजन पोटमार्टम करवाना चाहते हैं तो करवा सकते हैं।
- डॉ अरुण जोशी, एमएस, एसटीएच