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आया नया निजाम, जुर्माने का डर खत्म
विजेंद्र श्रीवास्तव, हल्द्वानी।
Updated Mon, 05 Sep 2016 12:32 AM IST
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नया निजाम आने के बाद अवैध खनन, भंडारण करने वालों में साल-दर-साल जुर्माना जमा करने का डर खत्म होता चला गया। कहते हैं कि आंकड़े झूठ नहीं बोलते हैं, यह हम नहीं बल्कि खान विभाग के आंकड़े कह रहे हैं। 2013-2014 में तो 6 करोड़ 68 लाख का जुर्माना लगाया गया, लेकिन जमा धेला भर भी नहीं हुआ। हालांकि बड़ी संख्या में लोगों की आरसी काटने के साथ जुर्माना जमा करने की कोशिश की बात जरूर कही जा रही है।
अवैध खनन, भंडारण रोकने के लिये तमाम उपक्रम करने का दावा किया जाता है। एंटी माइनिंग सेल तक बनी। बड़े पुलिस अफसरों को कमान भी सौंपी गई, इसके बाद भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। कानून, नियम को ताक पर रखकर जमीन, नदियों को खोदा जा रहा है। पहले तो सरकारी महकमों को जांच, जुर्माना लगाने में पसीने आते हैं, अगर लगा भी तो जमा होने की स्थिति नहीं आ रही है। हर साल जुर्माना जमा होने की रफ्तार कम हुई है।
खान विभाग के आंकड़ों के ही अनुसार नैनीताल जिले में 2010-11 में 31 मामलों में 4 करोड़ 55 लाख का जुर्माना लगाया गया। इसमें 3 करोड़ 62 जमा हो गया। 2011-12 में भी 31 प्रकरणों में अवैध खनन, भंडारण करने वालों पर 4 करोड़ 9 लाख का जुर्माना ठोका गया। इसमें 3.5 करोड़ जमा हुआ। 2012-13 में स्थिति कुछ हद तक ठीक रही। 63 मामलों में 1 करोड़ 44 लाख की पेनाल्टी लगाई, इसमें 91 लाख जमा भी हो गई।
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2012 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद जुर्माना जमा करने का डर खत्म होने लगा। 2013-14 में 93 मामलों में कार्रवाई हुई। इसमें ताबड़तोड़ 6 करोड़ 68 लाख की पेनाल्टी लगाई गई। इस साल तो धेला भर भी जमा नहीं हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा थे। कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और फरवरी-2014 में हरीश रावत की सरकार बनी। 2014-15 के वित्तीय साल में 40 मामले सामने आये। इसमें दो करोड़ 40 लाख का जुर्माना लगाया गया। इसमें बड़ी मुश्किल से 29 लाख का जुर्माना जमा हो सका है। खुद खान विभाग के अधिकारी कह रहे हैं, 32 करोड़ तो सीधे तौर पर जमा किये जाने हैं, इसके लिये बाकायदा आरसी तक काटी गई है।
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अवैध खनन, भंडारण रोकने के लिये तमाम उपक्रम करने का दावा किया जाता है। एंटी माइनिंग सेल तक बनी। बड़े पुलिस अफसरों को कमान भी सौंपी गई, इसके बाद भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। कानून, नियम को ताक पर रखकर जमीन, नदियों को खोदा जा रहा है। पहले तो सरकारी महकमों को जांच, जुर्माना लगाने में पसीने आते हैं, अगर लगा भी तो जमा होने की स्थिति नहीं आ रही है। हर साल जुर्माना जमा होने की रफ्तार कम हुई है।
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खान विभाग के आंकड़ों के ही अनुसार नैनीताल जिले में 2010-11 में 31 मामलों में 4 करोड़ 55 लाख का जुर्माना लगाया गया। इसमें 3 करोड़ 62 जमा हो गया। 2011-12 में भी 31 प्रकरणों में अवैध खनन, भंडारण करने वालों पर 4 करोड़ 9 लाख का जुर्माना ठोका गया। इसमें 3.5 करोड़ जमा हुआ। 2012-13 में स्थिति कुछ हद तक ठीक रही। 63 मामलों में 1 करोड़ 44 लाख की पेनाल्टी लगाई, इसमें 91 लाख जमा भी हो गई।
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2012 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद जुर्माना जमा करने का डर खत्म होने लगा। 2013-14 में 93 मामलों में कार्रवाई हुई। इसमें ताबड़तोड़ 6 करोड़ 68 लाख की पेनाल्टी लगाई गई। इस साल तो धेला भर भी जमा नहीं हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा थे। कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और फरवरी-2014 में हरीश रावत की सरकार बनी। 2014-15 के वित्तीय साल में 40 मामले सामने आये। इसमें दो करोड़ 40 लाख का जुर्माना लगाया गया। इसमें बड़ी मुश्किल से 29 लाख का जुर्माना जमा हो सका है। खुद खान विभाग के अधिकारी कह रहे हैं, 32 करोड़ तो सीधे तौर पर जमा किये जाने हैं, इसके लिये बाकायदा आरसी तक काटी गई है।