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अमगढ़ी में खिसका पहाड़, मलबे में दबी महिला को बचाया

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Sep 2021 12:41 AM IST
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The mountain slipped in Amgarhi, rescued the woman buried in the rubble
रामनगर (नैनीताल)। कोटाबाग ब्लॉक की ग्राम सभा अमगढ़ी के गांव खैराड़ में रविवार को हुए भूस्खलन में तीन मकान दब गए। एक घर में परिवार खाना खा रहा था, तभी मलबा आ गया। घर से बाहर निकलते समय एक महिला मलबे में दब गई, जिसे ग्रामीणों ने किसी तरह बचा लिया। मलबे में घरों में रखा अनाज और अन्य सामान दबकर नष्ट हो गया है।
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ग्राम सभा अमगढ़ी के अंतर्गत खैराड़ गांव में करीब 30 परिवार रहते हैं। जिस पहाड़ी पर गांव बसा है, वहां दैवी आपदा के चलते पिछले एक माह से भूस्खलन हो रहा है। भूस्खलन की जानकारी ग्राम प्रधान गंगा नैनवाल और उनके पति गणेश नैनवाल ने प्रशासन को दी, जिसके बाद प्रशासन ने ग्रामीणों के रहने की व्यवस्था इंटर कॉलेज में कर दी। वहीं ग्रामीणों के मवेशी अभी भी गांव में हैं, ऐसे में ग्रामीण दिन में गांव में जाकर मवेशियों की देखभाल कर रहे हैं लेकिन रात में सोने के लिए इंटर कॉलेज में पहुंच रहे हैं।
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रविवार दोपहर 12 बजे रमेश चंद्र अपने मकान में पत्नी नीमा देवी और तीन बच्चों गौरव, आकाश और सूरज के साथ खाना खा रहे थे, तभी भूस्खलन हो गया और मकान के ऊपर मलबा आ गया। घर से बाहर निकलते समय नीमा देवी मलबे की चपेट में आ गई। इसके बाद ग्रामीणों ने किसी तरह से उसे मलबे से बाहर निकाला। बताया गया कि नीमा देवी के पैर और कमर में गंभीर चोटें आई हैं। बाद में सभी ग्रामीण इंटर कॉलेज पहुंचे। इसके बाद महिला को 108 एंबुलेंस से रामनगर के सरकारी अस्पताल लाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। वहीं भूस्खलन में चंदन राम और दीवानी राम का मकान भी दब गया। सभी का अनाज और घरेलू सामान मलबे में दब गया है।
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पटवारी कपिल कुमार प्रजापति का कहना है कि खैराड़ गांव के ग्रामीणों को अमगढ़ी इंटर कॉलेज में रखा गया है। खैराड़ में भूस्खलन हुआ है और नुकसान का जायजा सोमवार को लिया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों को खैराड़ गांव नहीं जाने को कहा गया है।
डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल का कहना है कि भूस्खलन को देखते हुए खैराड़ के ग्रामीणों को अमगढ़ी इंटर कॉलेज में रखा गया था। इन्हें पहले ही पट्टे दे दिए गए थे, जब तक मौसम ठीक होता है तब तक ग्रामीण इंटर कॉलेज में ही रहें। मौसम ठीक होने के बाद आगे कार्यवाही जाएगी।

ग्रामीणों को खैराड़ नहीं जाने की अपील
ग्राम प्रधान पति गणेश नैनवाल ने बताया कि पीड़ित परिवारों के लोगों में प्रेम राम, ईश्वरी लाल, कृपाशंकर, केशव राम, पीतांबर, गिरीश चंद्र, खुशाली राम, दलीप कुमार, चंदन राम, पूरन चंद्र, दीवानी राम, तारा चंद्र, लछिमा देवी, मनेति देवी, हरुलि देवी, बबीता देवी, मोहनी देवी, चंपा देवी, भावना देवी, मालती देवी, भगवती देवी आदि हैं। ग्रामीणों को 2006 में भलौन गांव में पट्टे मिले थे लेकिन ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण ये लोग वहां मकान नहीं बना पाए। इंटर कॉलेज में ग्रामीण रह रहे हैं, लेकिन पानी-बिजली की सुविधा नहीं है। भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए उन्होंने खैराड़ गांव नहीं जाने की अपील की है।
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