फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   The elderly have the thirteenth ceremony alive

बुजुर्ग ने जीते-जी कर ली तेरहवीं की रस्म

Thu, 10 Sep 2015 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/रामनगर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/रामनगर। Updated Thu, 10 Sep 2015 12:45 AM IST
विज्ञापन
यूं तो हिंदू धर्म में मरने के बाद तेरहवीं की जाती है, लेकिन कोई जीते-जी अपनी तेरहवीं करवा ले, तेरहवी पर लोगों को खुद ही मेजबान बनाकर भोज कराये और दान दे तो बात कुछ अटपती लगती है। लेकिन रामनगर क्षेत्र में ऐसा वास्तव में हुआ है।
विज्ञापन


मूलरूप से राजपुर बहजोई संभल (यूपी) और हाल मोतीमहल गांधीघाट निवासी 90 वर्षीय रूपराम ने ऐसा ही कुछ किया, जिसने भी सुना वह हैरान रह गया।

विज्ञापन


 रूपराम ने अपने क्रिया कर्म का इंतजाम भी कर दिया है। इसके लिये उसने पड़ोस में रहने वाली समाजसेविका को कुछ नगदी दे दी है।

रूपराम के अनुसार वह 42 साल से रामनगर में रह रहे हैं। वह शादी समारोह में कारीगरी का काम करते थे। अब उन्होंने अपने कमरे में ही थोड़ा सामान रखकर दुकान का रूप दे दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 20 साल पहले पत्नी का निधन हो चुका है। उनकी दोनों विवाहित पुत्रियां रामनगर में ही रहती हैं। उनकी मौत के बाद बेटियों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए उन्होंने खुद तेरहवीं कराने का फैसला लिया है।

रूपराम अपने मकान को इस शर्त पर बेच चुके हैं कि मरने तक वह एक कमरे में रहेंगे। कमरे में ही एक छोटी सी दुकान के सहारे रूपराम अपने दिन काट रहे हैं। अब कहते हैं जो दिन कट जाता है वही अपना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed