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सूर्यग्रहण में बंद रहे कपाट, ग्रहण समाप्ति पर विधि विधान से हुई पूजा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 26 Oct 2022 12:57 AM IST
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The doors remain closed during the solar eclipse, worship done by law at the end of the eclipse
हल्द्वानी में सूर्यग्रहण के कारण प्राचीन श्रीराम मंदिर के बंद रहे कपाट। अमर उजाला
हल्द्वानी। साल का आखिरी सूर्यग्रहण दीपावली के दूसरे दिन सोमवार को लगा। सूतक काल सुबह से ही शुरू हो गया था जिस वजह से मंदिरों के कपाट बंद रहे और पूजा अर्चना नहीं हुई। वहीं ग्रहण के दौरान भी लोगों ने भोजन, पानी का त्याग किया। शाम को सूर्यास्त के बाद लोगों ने नदी में स्नान किया और उसके बाद विधि विधान से पूजा अर्चना शुरू हुई। खगोलीय घटना को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता देखी गई। दीपावली के दूसरे दिन ग्रहण का संयोग 1995 में देखा गया था।
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दोपहर 4:28 बजे से ग्रहण की शुरुआत हुई और शाम 5:29 बजे तक सूर्यास्त में ग्रहण समाप्त हुआ। सूतक काल सुबह से शुरु होने के कारण मंगलवार को कोई त्योहार नहीं मनाया गया। ग्रहण के दौरान लोग घरों में ही रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। ग्रहण के दौरान लोगों ने उपवास रखा और दान किया। शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान किया और देवताओं को स्नान कराकर फिर देव पूजन शुरू किया। रानीबाग में भी शाम को स्नान के लिए लोगों की काफी भीड़ रही।
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ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण का राशियों पर भी प्रभाव पड़ा। मेष राशि में मान सम्मान, विद्या हानि। वृष में राज्य व्यापार लाभ, मिथुन राशि में आर्थिक शैक्षिक लाभ और कर्क राशि में खर्च आर्थिक नुकसान का प्रभाव रहेगा। इसके अलावा सिंह राशि में शरीर कष्ट, मानसिक तनाव। कन्या में धन हानि, पारिवारिक विवाद। तुला राशि में लक्ष्मी प्राप्ति, यश कीर्ति। वृश्चिक में रोग कष्ट, विद्या हानि। धनु में संतान कष्ट, तनाव। मकर में स्वास्थ्य लाभ। कुंभ राशि में दांपत्य जीवन में खलल, आत्मग्लानि और मीन राशि में शरीर कष्ट, मानसिक तनाव का प्रभाव रहेगा। ज्योतिषाचार्य आंवलेश्वर महादेव मंदिर के महंत गोपाल भट्ट ने बताया कि 24 अक्तूबर 1995 को ऐसा संयोग हुआ था तब दीपावली एक दिन पहले 23 अक्तूबर को मनाई गई।
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