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पुल तब बने, जब इंजीनियर मिले
ब्यूूराे, अमर उजाला, हल्द्वानी।
Updated Sat, 19 Sep 2015 01:18 AM IST
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यूपी के ब्रिज कारपोरेशन की तरह उत्तराखंड में पुल बनाने का काम भी बिल्कुल अलग और विशेष इकाई से कराने का फैसला किया गया।
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कुमाऊं और गढ़वाल में मुख्य अभियंता एनएच एवं ब्रिजेज पद बनाया गया, लेकिन अभी तक कोई काम इंजीनियर न होने के कारण शुरू नहीं हो सका है।
यूपी में ब्रिज, फ्लाईओवर आदि बनाने का काम ब्रिज कारपोरेशन करता है। यह विभाग दूसरे राज्यों में ठेके लेता है। शासन ने भी भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर ब्रिज का काम अलग संस्था से कराने का फैसला किया।
संस्था का काम बड़े पुलों का निर्माण कराना है। इसके तहत रानीबाग में कुमाऊं के लिए मुख्य अभियंता स्तर का पद सृजित किया गया। पर अभी तक कोई भी काम शुरू नहीं हो सका है।
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कारण विभाग के पास तय पदों पर जेई, एई, ईई, अधीक्षण अभियंता स्तर के जो इंजीनियर के पद हैं, वह खाली हैं। अब अगर काम ले लिया भी जाए, तो उसको देखने वाला ही कोई नहीं होगा।
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विभाग ने स्वेच्छा से लोनिवि आदि विभागों से इंजीनियरों को ब्रिज विभाग में आने का ‘न्यौता ’ संबंधी पत्र भेजा था। पर इंजीनियर नहीं आये।
अब नये सिरे से इंजीनियरों को विभाग में आने के लिए आमंत्रित किया गया है। एनएच चीफ अयाज कहते हैं कि इंजीनियरों को विभाग में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद आगे का काम शुरू किया जाएगा।