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फ्लोर टेस्ट पर अब 19 तक रोक  

Thu, 07 Apr 2016 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल Updated Thu, 07 Apr 2016 11:48 PM IST
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हाईकोर्ट ने उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के एकलपीठ के आदेश को 19 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया है। राष्ट्रपति शासन लागू करने के मामले में बागी विधायकों के पक्षकार बनने की अर्जी को स्वीकार करते हुए उनके पक्ष पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। दूसरी तरफ निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत आज खुद नैनीताल पहुंचे। हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष  उनकी ओर से नई अर्जी लगाते हुए कहा गया कि राज्यपाल को आदेशित किया जाए कि प्रदेश में भाजपा को सरकार बनाने से रोक कर मौका पहले उन्हें दिया जाना चाहिए। 
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने और वित्त विधेयक अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका समेत अन्य मामले की दिनभर सुनवाई हुई। राष्ट्रपति शासन लगाने के खिलाफ दायर याचिका में दूसरे दिन भी याचिकाकर्ता निवर्तमान सीएम हरीश रावत की ओर से पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस जारी रखी।
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सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का मुख्य मुद्दा 18 मार्च को विधानसभा में विनियोग विधेयक के गिर जाने को बनाया है। उन्होंने कहा कि यदि विनियोग विधेयक गिर गया था तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामेश्वर प्रसाद व एसआर बोम्मई आदि मामले में दी गई व्यवस्था के मुताबिक सरकार गिरने का निर्णय फ्लोर टेस्ट में होना चाहिए था। उन्होंने बताया कि यदि हाउस में स्पीकर से कोई गलती हुई तो उसका रिव्यू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए आठ पत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी एक पत्र में भी उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का उल्लेख नहीं है। 
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने मीडिया में आ रही रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा राज्य में सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। जब तक अदालत में मामला विचाराधीन है तब तक भाजपा को ऐसा करने से रोका जाए। जबकि इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि 18 मार्च को मत विभाजन की मांग की गई थी, लेकिन स्पीकर ने इनकार कर दिया था।

साथ ही कहा कि जब 18 मार्च को बिल पास हुआ दिखाया गया तथा बागियों को अयोग्य करने तक उसे राज्यपाल के पास नहीं भेजा गया। याची के आरोपों पर जवाब देते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि भाजपा यदि सरकार बनाने का प्रयास करती है तो पहले हाईकोर्ट को सूचित किया जाएगा। साथ ही यह भी बताया कि इस मामले में बीजेपी को पक्षकार नहीं बनाया है। राज्यपाल को कानूनी रूप से पक्षकार नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। पक्षों की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक 19 अप्रैल तक बढ़ा दी। पहले एकलपीठ के आदेश पर सात अप्रैल तक रोक लगाई थी। अदालत बागी विधायकों के मामले में सुनवाई शुक्रवार को करेगी, जबकि अन्य याचिकाओं पर सुनवाई 18 अप्रैल को हागी।

 

 वित्त विधेयक मामले में केंद्र को दिया जवाब दाखिल करने का समय
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने वित्त विधेयक प्रकरण पर केंद्र को 12 अप्रैल तक वित्त विधेयक मामले में दायर याचिका में अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है। 13 अप्रैल से रामनवमी का अवकाश होने के कारण इसे अवकाश खत्म होने के तुरंत बाद 18 अप्रैल की तिथि सुनवाई के लिए नियत की है। बता दें कि हरीश रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राष्ट्रपति की ओर से 31 मार्च 2016 को जारी उस अध्यादेश को चुनौती दी थी, जिसमें उत्तराखंड के वित्त विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित कर दिया गया था।  
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