{"_id":"626d8b6d95c6a317036aaf84","slug":"ten-years-ago-the-tomb-was-marked-in-corbett-ramnagar-news-hld461168042","type":"story","status":"publish","title_hn":"कॉर्बेट में दस साल पहले चिन्हित हुए थे मजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कॉर्बेट में दस साल पहले चिन्हित हुए थे मजार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट पार्क में 2011 में वन क्षेत्र में मजार और मंदिरों को चिह्नित किया गया था। तब पार्क प्रशासन की ओर से एक रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। अब एक बार फिर मजारों को चिह्नित करने की बात चल रही है। पार्क प्रशासन फिर चिन्हीकरण करेगा।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने डिविजनों के साथ ही नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के अफसरों को धार्मिक स्थल के नाम पर हुए अतिक्रमण का ब्योरा जुटाने का निर्देश दिया है। कार्बेट टाइगर रिजर्व की बात करें तो पार्क के भीतर बिजरानी रेंज स्थित इमलीखान मजार में होने वाले सालाना उर्स में सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। कोरोनाकाल में पिछले दो साल से सालाना उर्स का आयोजन और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा है। तीन अन्य जगहों पर बने मजार में लोग जाते हैं। बताया जाता है कि ये सभी मजार काफी पुराने हैं। कॉर्बेट पार्क के वार्डन आरके तिवारी ने बताया कि 2011-12 में कॉर्बेट सहित रामनगर के सभी डिविजनों में मजार और मंदिरों को चिह्नित किया गया था। उस समय शासन को रिपोर्ट भेजी भी गई थी लेकिन उसके बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई थी। अब फिर से एक बार फिर कॉर्बेट पार्क प्रशासन चिन्हीकरण करेगा।
मजार के बहाने वन भूमि पर अवैध कब्जा
रामनगर में कोसी नदी किनारे वन विभाग की जमीन पर हजारों की संख्या में मुस्लिम मजदूरों ने झोपड़ियां बना ली हैं। यहां भी दरगाह और मजारें हैं। वनाधिकारियों के अनुसार दरगाह-मजार के बहाने सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। राज्य बनने तक यहां नाममात्र की मुस्लिम आबादी हुआ करती थी लेकिन साल 2010 और 2020 के कालखंड में यहां जंगलों के भीतर अचानक मजारें नजर आने लगीं। अब यहां उर्स मनाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने डिविजनों के साथ ही नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के अफसरों को धार्मिक स्थल के नाम पर हुए अतिक्रमण का ब्योरा जुटाने का निर्देश दिया है। कार्बेट टाइगर रिजर्व की बात करें तो पार्क के भीतर बिजरानी रेंज स्थित इमलीखान मजार में होने वाले सालाना उर्स में सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। कोरोनाकाल में पिछले दो साल से सालाना उर्स का आयोजन और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा है। तीन अन्य जगहों पर बने मजार में लोग जाते हैं। बताया जाता है कि ये सभी मजार काफी पुराने हैं। कॉर्बेट पार्क के वार्डन आरके तिवारी ने बताया कि 2011-12 में कॉर्बेट सहित रामनगर के सभी डिविजनों में मजार और मंदिरों को चिह्नित किया गया था। उस समय शासन को रिपोर्ट भेजी भी गई थी लेकिन उसके बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई थी। अब फिर से एक बार फिर कॉर्बेट पार्क प्रशासन चिन्हीकरण करेगा।
विज्ञापन
मजार के बहाने वन भूमि पर अवैध कब्जा
रामनगर में कोसी नदी किनारे वन विभाग की जमीन पर हजारों की संख्या में मुस्लिम मजदूरों ने झोपड़ियां बना ली हैं। यहां भी दरगाह और मजारें हैं। वनाधिकारियों के अनुसार दरगाह-मजार के बहाने सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। राज्य बनने तक यहां नाममात्र की मुस्लिम आबादी हुआ करती थी लेकिन साल 2010 और 2020 के कालखंड में यहां जंगलों के भीतर अचानक मजारें नजर आने लगीं। अब यहां उर्स मनाया जाता है।
विज्ञापन