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बेटी के साथ दुष्कर्म में दोषी सौतेले पिता को दस साल की सजा
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हल्द्वानी। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने बेटी से दुष्कर्म के मामले में सौतेले पिता को दोषी ठहराते हुए दस साल की सजा और 26 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। किशोरी मां को भी छह महीने की जेल और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी के अनुसार दुष्कर्म पीड़िता जिस समय डेढ़ साल की थी, उसकी मां पिता से अलग हो गई। मां हल्द्वानी में होर्डिंग का काम करने वाले व्यक्ति के साथ रहने लगी और बेटी को मध्य प्रदेश के रीवा स्थित ननिहाल में छोड़ दिया। ननिहाल में बेटी ने सातवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद मां उसे हल्द्वानी ले आई। उसका यहां आठवीं में दाखिला करवाया गया। नवीं कक्षा में पढ़ाई के समय बेटी की उम्र 13 साल की थी। बताया गया कि कुछ दिनों के लिए मां दिल्ली चली गई। आरोप है कि इस बीच सौतेले पिता ने बेटी के साथ मारपीट कर तीन बार संबंध बनाए। मां जब दिल्ली से लौटकर आई तो उसने मां को कुछ नहीं बताया क्योंकि बेटी को मां पर भरोसा नहीं था। परिवार 2015 से अप्रैल 2016 तक किराए के मकान में रह रहा था। इस घटना के बाद पिता ने मकान बदल दिया और पड़ोस के मकान में किराए का कमरा लेकर रहने लगा। एक दिन पीड़िता ने पड़ोसी भगवती के बेटे कौशिक को आपबीती बताई। कौशिक उसे लेकर दिल्ली गया और एक पीजी में रख दिया। इस मामले में कौशिक के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था लेकिन हाईकोर्ट ने इस मुकदमे की खारिज कर दिया। इसके बाद कौशिक ने पीड़िता को अपने रिश्तेदार के घर रख दिया। 2016 में भगवती पीड़िता को लेकर हल्द्वानी आई। यहां एक एनजीओ की मदद से उसकी काउंसलिंग की गई। पीड़िता ने कोतवाली थाने में सौतेले पिता के खिलाफ तहरीर दी। इसी आधार पर पुलिस ने माता पिता के खिलाफ नौ दिसंबर 2016 को 376, 376 (2), 6(2), 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने माता पिता को गिरफ्तार किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों को पेश किया। अदालत ने दुष्कर्म पीड़िता को एक लाख रुपये की सहायता दिलाने के लिए जिला विधिक प्राधिकरण को पत्र भेजने का आदेश भी दिया है।
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जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी के अनुसार दुष्कर्म पीड़िता जिस समय डेढ़ साल की थी, उसकी मां पिता से अलग हो गई। मां हल्द्वानी में होर्डिंग का काम करने वाले व्यक्ति के साथ रहने लगी और बेटी को मध्य प्रदेश के रीवा स्थित ननिहाल में छोड़ दिया। ननिहाल में बेटी ने सातवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद मां उसे हल्द्वानी ले आई। उसका यहां आठवीं में दाखिला करवाया गया। नवीं कक्षा में पढ़ाई के समय बेटी की उम्र 13 साल की थी। बताया गया कि कुछ दिनों के लिए मां दिल्ली चली गई। आरोप है कि इस बीच सौतेले पिता ने बेटी के साथ मारपीट कर तीन बार संबंध बनाए। मां जब दिल्ली से लौटकर आई तो उसने मां को कुछ नहीं बताया क्योंकि बेटी को मां पर भरोसा नहीं था। परिवार 2015 से अप्रैल 2016 तक किराए के मकान में रह रहा था। इस घटना के बाद पिता ने मकान बदल दिया और पड़ोस के मकान में किराए का कमरा लेकर रहने लगा। एक दिन पीड़िता ने पड़ोसी भगवती के बेटे कौशिक को आपबीती बताई। कौशिक उसे लेकर दिल्ली गया और एक पीजी में रख दिया। इस मामले में कौशिक के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था लेकिन हाईकोर्ट ने इस मुकदमे की खारिज कर दिया। इसके बाद कौशिक ने पीड़िता को अपने रिश्तेदार के घर रख दिया। 2016 में भगवती पीड़िता को लेकर हल्द्वानी आई। यहां एक एनजीओ की मदद से उसकी काउंसलिंग की गई। पीड़िता ने कोतवाली थाने में सौतेले पिता के खिलाफ तहरीर दी। इसी आधार पर पुलिस ने माता पिता के खिलाफ नौ दिसंबर 2016 को 376, 376 (2), 6(2), 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने माता पिता को गिरफ्तार किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों को पेश किया। अदालत ने दुष्कर्म पीड़िता को एक लाख रुपये की सहायता दिलाने के लिए जिला विधिक प्राधिकरण को पत्र भेजने का आदेश भी दिया है।
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